PM Vishwakarma Yojana: भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं, जिनकी आजीविका पारंपरिक कामों पर टिकी हुई है। कोई कपड़े सिलता है, कोई जूते बनाता है, तो कोई लकड़ी, लोहे या मिट्टी से जुड़े काम करता है। ये कारीगर अपनी मेहनत और हुनर से परिवार का पेट पालते हैं, लेकिन पैसों की कमी, नई तकनीक का अभाव और महंगे लोन उनके आगे बढ़ने में रुकावट बन जाते हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की है।

क्या है पीएम विश्वकर्मा योजना
पीएम विश्वकर्मा योजना खास तौर पर पारंपरिक कारीगरों और दस्तकारों के लिए बनाई गई है। इस योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को मजबूत बनाना है, जो अपने हाथों के हुनर से काम करते हैं। सरकार चाहती है कि कारीगर सिर्फ मेहनत तक सीमित न रहें, बल्कि अपने काम को एक छोटे कारोबार के रूप में आगे बढ़ा सकें।
अब तक कितने लोग जुड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते दो सालों में करीब 30 लाख लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं। इनमें से अधिकतर कारीगरों की स्किल जांच पूरी हो चुकी है और बड़ी संख्या ने ट्रेनिंग भी हासिल कर ली है। इससे साफ है कि यह योजना शहरों के साथ-साथ गांवों में भी तेजी से असर दिखा रही है।
कारीगरों को क्या-क्या मदद मिलती है
इस योजना के तहत कारीगरों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। उन्हें काम से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि उनका हुनर और बेहतर हो सके। इसके अलावा नए और आधुनिक औजार खरीदने के लिए आर्थिक सहायता मिलती है। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाता है, जिससे कारीगर नए जमाने के साथ कदम मिला सकें।
ट्रेनिंग के दौरान भी मिलेगी कमाई
पीएम विश्वकर्मा योजना की एक खास बात यह है कि ट्रेनिंग के समय कारीगरों को रोजाना 500 रुपए का भत्ता दिया जाता है। इससे उन्हें सीखने के दौरान भी आर्थिक दिक्कत नहीं होती। ट्रेनिंग पूरी होने पर उन्हें सर्टिफिकेट और पहचान पत्र भी दिया जाता है, जिससे उनकी पहचान मजबूत होती है।
बिना गारंटी मिलेगा आसान लोन
अगर कोई कारीगर अपना काम शुरू करना या बढ़ाना चाहता है, तो इस योजना के तहत बिना किसी गारंटी के लोन मिल सकता है। पहले चरण में 1 लाख रुपए तक का कर्ज मिलता है। इसके बाद काम बढ़ाने के लिए 2 लाख रुपए तक का दूसरा लोन लिया जा सकता है। ब्याज दर काफी कम रखी गई है, ताकि कारीगरों पर बोझ न पड़े।
कौन कर सकता है आवेदन
यह योजना चुनिंदा पारंपरिक काम करने वालों के लिए है। इसमें दर्जी, मोची, नाई, धोबी, लोहार, राजमिस्त्री, खिलौना बनाने वाले, टोकरी या झाड़ू बनाने वाले जैसे कई कारीगर शामिल हैं।
आवेदन कैसे करें
इस योजना में आवेदन करना आसान है। कारीगर ऑनलाइन वेबसाइट के जरिए या फिर अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर पंजीकरण करा सकते हैं।
पीएम विश्वकर्मा योजना उन कारीगरों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर सामने आई है, जो अपने हुनर को पहचान दिलाना चाहते हैं और आत्मनिर्भर बनकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
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