पीएम नरेंद्र मोदी ने आज गरीब कल्याण रोजगार अभियान लॉन्च किया।
नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी ने आज गरीब कल्याण रोजगार अभियान लॉन्च किया। पीएम मोदी ने ग्रामीण भारत में रोजगार मुहैया कराने के लिए बिहार के खगड़िया से इसकी शुरुआत कर दी। दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस अभियान को पीएम ने लॉन्च किया। कोरोनावायरस लॉकडाउन की वजह से लाखों में प्रवासी मजदूर अपने राज्य लौटने को मजबूर हुए हैं। जहां उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं है। ऐसे में सरकार खासतौर पर उन्हें ध्यान में रखते हुए गरीब कल्याण रोजगार अभियान लॉन्च करने वाली है।

छह राज्यों के 116 जिलों को मिलेगा इस अभियान का फायदा। सरकार अलग-अलग राज्यों से लौटने वाले मजदूरों की स्किल मैपिंग करेंगी। प्रवासी मजदूरों के लिए 25 अलग-अलग प्रोजेक्ट होंगे जिससे उन्हें रोजगार का मौका मिलेगा। बीते कल फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा कि 116 जिलों के सभी प्रवासी मजदूरों को मिलेगा रोजगार। जल जीवन मिशन, ग्राम सड़क योजना जैसी कई सरकारी योजनाओं के जरिए प्रवासी मजदूरों को काम दिया जाएगा। इन सभी परियोजनाओं में रोजगार के नए मौके शुरू किए जाएंगे।
मजदूरों की रोज होगी 202 रुपए की कमाई
कार्यक्रम के शुरुआत में पीएम ने सबसे पहले गलवान घाटी में शहीद हुए बिहार के सैनिकों याद करते हुए कहा कि प्राक्रम बिहार रेजीमेंट का है। उन्होंने शहीदों के परिवार जनों से कहा कि देश उनके साथ है। जिन राज्यों को इस योजना से फायदा होगा उसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा शामिल हैं। इस योजना में सबसे ज्यादा बिहार के 32 जिलों को जोड़ा गया है। सरकार का दावा है कि मजदूरों की स्किल मैपिंग की गई है। गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत कुल 125 दिनों का काम चलेगा। इसमें रोज की मजदूरी मनरेगा की मजदूरी के हिसाब से ही दी जाएगी। इस लिहाज से एक कामगार को रोज 202 रुपये मिलेंगे।
मजदूरों की ऐसी होगी पहचान
जो मजदूर श्रमिक स्पेशल या राज्य सरकार द्वारा अन्य तरीके से गांव वापस भेजे गए हैं, उनके नाम की सूची पहले से ही सरकार के पास है। उसी सूची के आधार पर उन्हें काम दिलवाया जाएगा। जो मजदूर किसी शहर से पलायन कर पैदल या किसी अन्य साधन से अपने गांव पहुंचे हैं, उनकी सूची भी संबंधित जिला के जिलाधिकारी के पास है। हालांकि ऐसे लोगों को अपनाप नाम चेक कर लेना चाहिए। रोजगार अभियान में काम कराने से लेकर मजदूरी के भुगतान का काम, सब राज्य सरकार के अधिकारी ही करेंगे।
इस योजना की मुख्य बातें-
- छह राज्यों के 116 जिलों में 125 दिनों के अभियान का उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए मिशन मोड में काम करना है।
- इस कार्यक्रम के तहत बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के 116 जिलों को कवर किया जाएगा। इन सभी जिले में लॉकडाउन के दौरान 25 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक वापस लौटे हैं।
- 50 हजार करोड़ रुपये के लागत वाले इस योजना के तहत रोजगार प्रदान करने और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 25 विभिन्न प्रकार के कार्यों का गहन और केंद्रित कार्यान्वयन शामिल होगा।
- यह अभियान बिहार के खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड के तेलिहर गांव से शुरू किया जाएगा।
- यह योजना 12 विभिन्न मंत्रालयों और विभागों- ग्रामीण विकास पंचायती राज, सड़क परिवहन और हाइवे, खनन, पेयजल व सैनिटेशन के जरिए सफल होगा।
प्रवासी मजदूर करेंगे ये काम
- सामुदायिक स्वच्छता परिसर
- ग्राम पंचायत भवन
- फाइनेंस कमीशन फंड के तहत किए जाने वाले काम
- राष्ट्रीय राजमार्ग के काम
- जल संरक्षण एवं जल संचयन के काम
- कुओं का निर्माण
- पैधरोपण के काम
- बागवानी के काम
- आंगनवाड़ी केंद्र के काम
- प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के काम
- ग्रामीण सड़क एवं सीमा सड़क के काम
- भारतीय रेल के तहत आने वाले काम
- श्यामा प्रसाद मुखर्जी अरबन मिशन
- भारत नेट के तहत फाइबर ऑप्टिकल केबल बिछाने का काम
- पीएम कुसुम योजना के काम
- जल जीवन मिशन के तहत कराए जाने वाले काम
- प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा प्रोजेक्ट
- कृषि विज्ञान केंद्र के तहत जीवनयापन की ट्रेनिंग
- जिला खनिज निधि के तहत आने वाले काम
- सॉलिड एवं लिक्विड वेस्ट मैनेजमैंट के काम
- फार्म पोंड योजना के काम
- पशु शेड बनाने का काम
- भेड़/बकरी के लिए शेड बनवाने का काम
- मुर्गी पालन के लिए शेड निर्माण
- केंचुआ खाद यूनिट तैयार कराना


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