नई दिल्ली, जुलाई 29। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय बुलियन एक्सचेंज को लॉन्च कर दिया है। प्रधानमंत्री ने गुजरात की राजधानी गांधीनगर के पास इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में इस एक्सचेंज को लॉन्च किया। यह नया बुलियन एक्सचेंज फिजिकल गोल्ड और सिल्वर के लिए लागू होगा। सरकार इस नए एक्सचेंज को शंघाई गोल्ड एक्सचेंज और बोरसा इस्तांबुल की तहत स्थापित करना चाहती है। सरकार की मंसा है कि भारत को बुलियन फ्लो के लिए एक प्रमुख क्षेत्रीय केंद्र बनाया जाए। आपको बात दें कि यह बुलियन एक्सचेंज कई ट्रायलों के बाद लांच हुआ है।
क्या है बुलियन
बुलियन का अर्थ है उच्च शुद्धता वाला फिजिकल गोल्ड और सिल्वर। जब इन धातुओं को बार, सिल्लियों या सिक्कों के रूप में रखा जाता है तो उसे बुलियन कहते हैं। बुलियन को कभी-कभी लीगल टेंडर के रुप में माना जा सकता है। अक्सर देश के केंद्रीय बैंक स्वर्ण भंडार के रूप में बुलियन को रखते हैं। निवेशक भी बुलियन में निवेश करते हैं।
क्या है उद्देश्य
भारत में साल 1990 के दशक में नोमिनेटेड बैंकों और एजेंसियों के माध्यम से सोने के आयात का उदारीकरण किया गया था। 90 के दशक के बाद पहली बार भारत में योग्य ज्वैलर्स को आईआईबीएक्स के माध्यम से सीधे सोना आयात की अनुमति दी गई है। इसलिए यह एक्सचेंज अपने आप में काफी महत्वपूर्ण जगह रखता है। इसके लिए ज्वैलर्स को अब एक मौजूदा ट्रेडिंग मेंबर का ट्रेडिंग पार्टनर या क्लाइंट होना जरूरी होगा। आपको बता दें कि एक्सचेंज ने भौतिक सोने और चांदी के रखरखाव के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है।
पहले कैसे होता है काम
वर्तमान में, भारत में सोने का आयात एक कंसाइनमेंट मॉडल के तहत तमाम शहरों में नामित बैंकों और आरबीआई द्वारा अनुमोदित एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है। इसके बाद ट्रेडर्स/ज्वैलर्स को कारोबार के लिए दिया जाता की है। बैंकों और अन्य एजेंसियों को हैंडलिंग, भंडारण आदि के लिए सोने के निर्यातक से फीस मिलती है। वर्तमान नियम के अनुसार घरेलू खरीदारों के साथ लेनदेन करते समय सोने में प्रीमियम भी जोड़ा जाता है।


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