नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आर. के तिवारी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के लाभार्थियों के डेटा में खामियां 30 नवंबर 2019 तक दुरुस्त करने को कहा है, ताकि उन्हें 1 दिसंबर 2019 से इस योजना का लाभ पाने में कठिनाई न हो। किसानों के आंकड़ों में खामियों के कारण पीएम-किसान योजना को लागू करने में परेशानी आ रही है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है।

1 करोड़ से ज्यादा किसान परेशान
करीब 1.3 करोड़ किसानों को डाटा में खामियों के कारण इससे बाहर कर दिया गया है। मुख्य सचिव के पत्र के अनुसार, केंद्र के पोर्टल पर डाली गई उत्तर प्रदेश के 1.11 करोड़ किसानों की सूचना गलत है। जिन किसानों का नाम पोर्टल पर डाला गया है, उनके नाम आधार कार्ड से नहीं मिल रहे हैं। अगर इसमें सुधार नहीं किया जाता है तो किसानों को 2000 रुपये की चौथी किस्त नहीं मिल पाएगी।
बैंक खातों की जानकारियां भी गलत
वहीं पत्र के अनुसार, करीब 20 लाख किसानों के बैंक खाते से संबंधित जानकारी भी गलत है, जिसे पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमसी) द्वारा अस्वीकार कर दिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही देश की सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य में प्रधानमंत्री की प्रमुख योजना के कार्यान्वयन में खामियों को लेकर अपना असंतोष जता चुके हैं।
बजट में लागू हुई थी यह योजना
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इस साल फरवरी में पीएम-किसान योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत सभी छोटे व सीमांत किसानों को न्यूनतम आय सहायता के रूप में प्रति वर्ष तीन किस्तों में 6000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है।
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