नयी दिल्ली। कोरोना से जंग में फंडिंग के लिए प्रधानमंक्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स फंड का ऐलान किया था। ये एक ऐसा फंड है, जिसमें देश के आम नागरिक भी छोटी राशि का योगदान दे सकते हैं। कई दिग्गज कारोबारियों ने इस फंड में बड़ी रकम का योगदान दिया है। वहीं कई सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों ने भी अपनी सैलेरी का कुछ हिस्सा पीएम केयर्स फंड में डोनेट किया। इनमें आरबीआई से लेकर एलआईसी तक शामिल हैं। बता दें कि कम से कम 7 सरकारी बैंकों, 7 अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थान और बीमाकर्ता कंपनियों और आरबीआई ने मिलकर अपने स्टाफ की सैलेरी से पीएम केयर्स फंड में 204.75 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। आइए जानते हैं इस योगदान के बारे में विस्तार से।
एलआईसी सहित इन बीमा कंपनियों का योगदान
रिकॉर्ड के अनुसार भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जीआईसी) और नेशनल हाउसिंग बैंक ने अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) आवंटन और अन्य प्रावधानों से अलग 144.5 करोड़ रुपये का योगदान दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार आरटीआई से हासिल की गई जानकारी में पता चला है कि 15 सरकारी बैंकों और संस्थानों का कुल योगदान 349.25 करोड़ रु रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, जो इस फंड को संभालता है, ने प्राप्त पैसे की डिटेल देने से इनकार कर दिया। पीएम ऑफिस ने कहा कि पीएम केयर्स फंड आरटीआई अधिनियम के तहत आने वाला एक सार्वजनिक प्राधिकरण (Public Authority) नहीं है।
किसने दिया सबसे ज्यादा पैसा
सरकारी बैकों और फाइनेंशियल संस्थानों में से पीएम केयर्स में सबसे अधिक योगदान एलआईसी ने दिया है। एलआईसी ने सबसे ज्यादा 113.63 करोड़ रु दिए हैं। इसमें से कंपनी ने 8.64 करोड़ रु स्टाफ की सैलेरी, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के तहत 100 करोड़ रु और 5 करोड़ रु गोल्डन जुबली फाउंडेशन के तहत दिए हैं। 7 सरकारी बैंकों में सबसे आगे एसबीआई रहा। देश के सबसे बड़े बैंक ने पीएम केयर्स फंड में 107.95 करोड़ रु का योगदान दिया। इनमें 31 मार्च को 100 करोड़ रुपये की पहली किश्त का भुगतान किया गया था। राष्ट्रीय बैंकिंग नियामक आरबीआई ने कहा कि इसका 7.34 करोड़ रुपये का योगदान कर्मचारियों की तरफ से रहा है।
मार्च में हुआ था ऐलान
कोरोना संकट को देखते हुए 28 मार्च को पीएम केयर्स फंड की शुरुआत की गई थी। शुरुआती 3 ही दिनों में 31 मार्च तक इसमें 3,076.62 करोड़ रुपये आ गए थे। इसमें से 3,075.85 करोड़ रुपये "स्वैच्छिक योगदान" के रूप में आए थे। फंड में सीएसआर के रूप में जीआईसी ने 22.8 करोड़ रु, 14.2 करोड़ रुपये सिडबी ने और 2.5 करोड़ रुपये नेशनल हाउसिंग बैंक ने दिए हैं। 19 अगस्त को इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि 38 सरकारी संस्थानों ने अपने सीएसआर फंड का उपयोग करके फंड में 2,105 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान किया।
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