नयी दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), जिसे पीएफ के नाम से भी जाना जाता है एक रिटायरमेंट सेविंग्स फंड है। इसमें सभी सैलेरी वाले लोगों को हर महीने योगदान देना जरूरी है। ये पैसा कंपनी उनकी सैलेरी से काट कर पीएफ अकाउंट में जमा करा देती है। यह एक टैक्स-फ्री निवेश है जिसका उद्देश्य लोगों को जरूरी रिटायरमेंट फंड मुहैया करना है। ईपीएफओ के 6 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इस जमा पैसे का क्या होता है? असल में इस पैसे को निवेश किया जाता है। ये सरकार तय करती है कि इस पैसे को कहां निवेश किया जाना है। निवेश में कुछ जगह जोखिम भी होता है। इसलिए ये जानना जरूरी है कि आपका पैसा कितना सुरक्षित है।
कहां-कहां होता है निवेश
ईपीएफओ ने मार्च 2015 में इंडेक्स ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) के माध्यम से इक्विटी और इससे रिलेटेड इन्वेस्टमेंट्स में निवेश करने का फैसला किया था। शुरुआत में ईएलएसएस 5 फीसदी तक निवेश करने का फैसला लिया गया था, जिसे बाद में 10 फीसदी कर दिया गया। फिर 2017 में इसे 15 फीसदी तक बढ़ाया गया। इक्विटी से रिलेटेड निवेशों में सेंसेक्स, निफ्टी 50, सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (सीपीएसई) और भारत 22 सूचकांकों पर आधारित ईटीएफ शामिल हैं। बाकी ईपीएफओ का पैसा सरकारी सिक्योरिटीज, बैंक एफडी और प्राइवेट सेक्टर बॉन्ड जैसी निश्चित आय वाली संपत्तियों में निवेश किया जाता है।
कितना है सुरक्षित
जहां तक सुरक्षा का सवाल है तो ईपीएफ बेहद सुरक्षित है, क्योंकि ये एक केंद्र सरकार समर्थित संस्थान है। यही वजह है कि कुछ लोग 58 साल की आयु न पूरी होने पर नौकरी छोड़ने के बावजूद ईपीएफ में अपना पैसा रखे रहते हैं। हालांकि यदि आप अपनी नौकरी छोड़ देते हैं और जल्दी रिटायर हो जाते हैं और बेरोजगार हैं तो भी आप ईपीएफ में पैसा रख सकते हैं, मगर उस पर पैसे मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगेगा।
2 किस्तों में ब्याज का कारण
कुछ सब्सक्राइबर्स को पता नहीं होगा कि ईपीएफओ ने कुछ साल पहले इक्विटी में ईपीएफ का कुछ हिस्सा निवेश करना शुरू किया था। कोरोना आ जाने से शेयर बाजार गिरा, जिससे ईपीएफओ की निवेश राशि भी घटी। इसीलिए इसने सितंबर में कहा कि वह 8.5 फीसदी की घोषित ब्याज दर का भुगतान एक बार में करने में सक्षम नहीं होगा। इसका भुगतान 8.15 फीसदी और 0.35 फीसदी की दो किस्तों में किया जाएगा।
इक्विटी निवेश पर उठते हैं सवाल
कई निवेशकों ने इक्विटी में निवेश शुरू करने के का स्वागत किया था। मगर कुछ निवेशक इसे सही नहीं मानते। असल में ईपीएफ एक लंबी अवधि वाला निवेश है। ऐसे में युवा शेयर बाजार में आई गिरावट से लंबे समय में उबर सकते हैं, जैसा कि कोरोना के समय में हुआ। मगर वे निवेशक जो रिटायरमेंट के करीब हैं वे अपने पैसे को ऐसी जोखिम वाली जगह निवेश नहीं होना देना चाहते।
ऐसे बढ़ाया जाता है निवेश
अगर आप ईपीएफ में निवेश राशि बढ़ाना चाहें तो आप वीपीएफ (Voluntary Provident Fund) से ऐसा कर सकते हैं। आपको अपने ऑफिस में इसकी जानकारी देनी होती है। वीपीएफ की सलाह एक्सपर्ट इसलिए देते हैं क्योंकि इतनी ऊंची ब्याज दर आपको कहीं और नहीं मिलेगी। दूसरे ये सरकार समर्थित होने के कारण सुरक्षित भी है।
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