5 मई, 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहीं। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच वाहन चालकों के लिए राहत बरकरार है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ईंधन के दाम बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने एक प्रेस ब्रीफिंग में आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की। हालांकि, कीमतों में इस स्थिरता के पीछे देश के सरकारी तेल क्षेत्र में एक बड़ा आर्थिक दबाव धीरे-धीरे आकार ले रहा है।
Petrol Diesel Price Today: 5 मई को आपके शहर में क्या हैं रेट? देखें पूरी लिस्ट
5 मई को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें इस प्रकार हैं: नई दिल्ली में 94.77 रुपये, मुंबई में 103.54 रुपये, बेंगलुरु में 102.96 रुपये, हैदराबाद में 107.50 रुपये और चेन्नई में 100.84 रुपये प्रति लीटर। वहीं, डीजल की बात करें तो दिल्ली में यह 87.67 रुपये, मुंबई में 90.03 रुपये, बेंगलुरु में 90.99 रुपये, हैदराबाद में 95.70 रुपये और चेन्नई में 92.39 रुपये प्रति लीटर पर टिका हुआ है। पिछले कई हफ्तों से इन दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

| शहर | पेट्रोल (रुपये/लीटर) | डीजल (रुपये/लीटर) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 94.77 | 87.67 |
| मुंबई | 103.54 | 90.03 |
| बेंगलुरु | 102.96 | 90.99 |
| कोलकाता | 105.41 | 92.02 |
| हैदराबाद | 107.50 | 95.70 |
| चेन्नई | 100.84 | 92.39 |
| चंडीगढ़ | 94.30 | 82.45 |
| जयपुर | 104.71 | 90.21 |
सरकार का बड़ा बयान: फिलहाल नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। सरकार ने अपने हालिया बयान में स्पष्ट किया है कि फिलहाल रिटेल फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और अभी कीमतें जस की तस बनी रहेंगी। जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के मुताबिक, "एलपीजी, पेट्रोलियम और डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और इनकी कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, इसलिए किसी भी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।"
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और तेल कंपनियों पर बढ़ता बोझ
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इस हफ्ते 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई, लेकिन यह अब भी 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पर पाबंदी और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसी माहौल के बीच भारत की फ्यूल प्राइसिंग पॉलिसी की कड़ी परीक्षा हो रही है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक महीने में 70 डॉलर से उछलकर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके जवाब में भारत सरकार पहले ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर चुकी है। इस कटौती का उद्देश्य इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों के घाटे (under-recoveries) को कम करना है, जो लागत से काफी कम दाम पर ईंधन की सप्लाई कर रही हैं। उस समय पेट्रोल पर करीब 26 रुपये और डीजल पर 81.90 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा था, जिससे कंपनियों को रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था।
क्या जल्द बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? जानें क्या है तैयारी
सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को संकेत दिए कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के महंगे होने के बावजूद पिछले चार साल से रिटेल कीमतें स्थिर हैं, जिससे तेल कंपनियों का घाटा बढ़ता जा रहा है। तेल कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार के साथ चर्चा कर रही हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की है कि तेल कंपनियां पेट्रोलियम और वित्त मंत्रालय के संपर्क में हैं और रेट बढ़ाने पर विचार-विमर्श चल रहा है।
खबरों के मुताबिक, सरकार पेट्रोल और डीजल में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर और घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 40 से 50 रुपये की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह फैसला लागू होता है, तो करीब चार साल में पहली बार ईंधन की कीमतों में बदलाव होगा। मई 2026 की शुरुआत में उम्मीद जताई जा रही थी कि 5 से 7 दिनों के भीतर इस पर फैसला हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से ब्रेंट क्रूड की कीमतों और मिडिल ईस्ट के हालातों पर निर्भर करेगा।
दुनिया भर में बढ़ी कीमतें, भारत ने अब तक थामे रखे दाम
ग्लोबल फ्यूल ट्रैकर्स के आंकड़े बताते हैं कि संघर्ष शुरू होने के बाद से दुनिया के 120 से ज्यादा देशों ने ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में कीमतें 30 से 50 फीसदी तक बढ़ी हैं। उत्तरी अमेरिका में करीब 30 फीसदी और यूरोप में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में भारत का कीमतों को स्थिर रखने का फैसला दुनिया भर में एक अपवाद की तरह देखा जा रहा है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार के पास दो विकल्प थे: या तो दूसरे देशों की तरह जनता पर बोझ डाल दिया जाए, या फिर सरकारी खजाने पर इसका असर पड़ने दिया जाए ताकि आम नागरिक सुरक्षित रहें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी खजाने पर चोट सहकर भी भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा करने का फैसला किया। सरकार ने टैक्स रेवेन्यू में बड़ा नुकसान उठाकर तेल कंपनियों के घाटे को कम करने की कोशिश की है।
अगली नजर इन बातों पर: कब होगा कीमतों पर फैसला?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर अंतिम फैसला कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगा। अगर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल की ओर वापस आता है, तो कीमतों में बढ़ोतरी टल सकती है या कम की जा सकती है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा, तो फैसला जल्द लेना पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन की लागत पर पड़ता है, जिससे खाने-पीने की चीजों और अन्य सामानों के दाम बढ़ जाते हैं। अनुमान है कि 4 से 5 रुपये की बढ़ोतरी से महंगाई दर (CPI) में 0.2 से 0.4 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है।
दूसरी ओर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों को "भ्रामक और शरारतपूर्ण" बताते हुए खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। अभी के लिए तो कीमतें स्थिर हैं, लेकिन जब तक कच्चा तेल 110 डॉलर के ऊपर बना हुआ है, तब तक इस स्थिरता पर दबाव बढ़ता रहेगा।


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