Petrol-Diesel Price: सरकार ने पेट्रोल और डीजल को लेकर बड़ा ऐलान किया है. केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज बढ़ाने का ऐलान किया है. इसके तहत सोमवार को सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर 2-2 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दिया है. सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में इसकी जानकारी दी है.
एक्साइज ड्यूटी को लेकर यह बदलाव मंगलवार से लागू हो जाएगा. बता दें कि ग्लोबल ट्रेड टेंशन के चलते कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें मंदी की आशंका की वजह से 63 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है. कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव पर ही घरेलू बाजार में फ्यूल प्राइसेज तय की जाती है.
विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स खत्म
नोटिफिकेशन के मुताबिक दिसंबर 2024 में सरकार ने इंटरनेशनल ऑयल की कीमतों में गिरावट के बाद घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल और जेट ईंधन (ATF), डीजल और पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर पुराने विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स को भी समाप्त कर दिया है. बता दें कि भारत ने पहली बार 1 जुलाई 2022 को विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाया था.
पेट्रोल-डीजल महंगा मिलने की वजह?
OMCs हर दिन फ्यूल रेट्स अपडेट करती हैं. सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में से एक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी IOCL के ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपए प्रति लीटर पर बिक रहा है. इसका कैलकुलेशन समझते हैं. एक लीटर का बेस प्राइस 55.46 रुपए रहा. भाड़ा पर खर्च 20 पैसे रहा. इसमें 19.90 रुपए की एक्साइज ड्यूटी जुड़ गई. फिर 3.77 रुपए का डीलर कमीशन भी जुड़ गया. इसके अलावा 15.39 रुपए का VAT लगा. इस लिहाज से पेट्रोल का भाव 94.72 रुपए हो गया.
सरकारी कंपनी की ही वेबसाइट पर डीजल की कीमतों का गणित समझतें हैं. इसके बेस प्राइस 56.20 रुपए है. इसमें भाड़ा खर्च 22 पैसे लगा. एक्साइज ड्यूटी 15.80 रुपए लगा. फिर औसत डीलर कमीशन 2.58 रुपए हुआ. आगे 12.82 रुपए का VAT लग गया. इस लिहाज से ग्राहकों को एक लीटर डीजल 87.62 रुपए का मिलता है.

कैसे तय होता है डीजल की कीमतें?
भारत में डीजल की कीमतें कई फैक्टर्स से प्रभावित होती हैं. इसमें इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें एक बड़ा फैक्टर है, जो ग्लोबल सप्लाई और डिमांड के साथ उतार-चढ़ाव करती हैं. इसके अलावा भारतीय रुपए और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया भर में कच्चे तेल का लेन-देन डॉलर में होता है. आयात के बाद कच्चे तेल को डीज़ल बनाने के लिए रिफाइन किया जाता है, जिससे एक्स्ट्रा कॉस्ट आती है. रिफाइनरियाँ इस प्रोसेस को संभालती हैं, जिसमें रिफाइनिंग और ऑपरेशन खर्च दोनों शामिल हैं.
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