पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पिछले 10 दिनों के भीतर तीसरी बड़ी वृद्धि है। तेल कंपनियों (OMCs) ने यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए उठाया है। इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती वैल्यू ने भी कीमतों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। अब आम आदमी को पेट्रोल पंप पर ज्यादा जेब ढीली करनी होगी, जिसका सीधा असर उनके रोजमर्रा के ट्रैवल बजट पर पड़ रहा है।
देश की राजधानी दिल्ली में आज सुबह पेट्रोल-डीजल के रिटेल रेट्स में बड़ा उछाल देखा गया। वहीं, लोकल टैक्स स्ट्रक्चर की वजह से मुंबई में ईंधन की कीमतें अभी भी सभी महानगरों में सबसे ज्यादा बनी हुई हैं। अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) की दरों में अंतर होने के कारण लोगों पर इसका आर्थिक बोझ भी अलग-अलग पड़ रहा है। आलम यह है कि बॉर्डर वाले शहरों में रहने वाले लोग सस्ता तेल भरवाने के लिए अक्सर दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं।

प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें और बढ़ोतरी का असर
| शहर का नाम | पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) | डीजल की कीमत (प्रति लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹96.72 | ₹89.62 |
| मुंबई | ₹106.31 | ₹94.27 |
| चेन्नई | ₹102.63 | ₹94.24 |
| कोलकाता | ₹106.03 | ₹92.76 |
लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने चेतावनी दी है कि ईंधन के बढ़ते दामों की वजह से जल्द ही डिलीवरी और ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ सकते हैं। ट्रांसपोर्टर्स अपना मुनाफा बचाने के लिए अक्सर इन बढ़े हुए खर्चों का बोझ ग्राहकों पर डाल देते हैं। इस ट्रेंड को देखते हुए माना जा रहा है कि दूध जैसी जरूरी चीजें भी जल्द महंगी हो सकती हैं। ऐसे में पाठकों को अगले हफ्ते से अपने ग्रॉसरी बिल में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना चाहिए।
अपनी गाड़ियों से चलने वाले लोग बार-बार होने वाली इस बढ़ोतरी के हिसाब से अपना मंथली बजट एडजस्ट करने लगे हैं। वहीं, टैक्सी और ऑटो-रिक्शा यूनियनों ने भी स्थानीय प्रशासन से किराए में तुरंत बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है। रोज कमाने-खाने वालों के लिए इन कीमतों का मतलब है उनकी बचत में सीधी कटौती। इस वजह से कई परिवार अब गैर-जरूरी चीजों और सेवाओं पर होने वाले खर्चों को कम करने को मजबूर हैं।
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का दबाव और डीजल की कीमतों का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं, जिससे रिटेलर्स और देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी ने कच्चे तेल का आयात और महंगा कर दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्लोबल प्रोडक्शन जल्द स्थिर नहीं हुआ, तो कीमतों में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सबकी नजरें इस हफ्ते होने वाली अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बैठकों के नतीजों पर टिकी हैं।
कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला जारी है, इसलिए ग्राहकों को रोजाना रेट चार्ट चेक करते रहना चाहिए। जनता को राहत देने के लिए अब राज्य सरकारों पर टैक्स कम करने का दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि इन बढ़ती कीमतों से देश की महंगाई दर कितनी ऊपर जाएगी। अगर आप लंबी यात्रा या थोक खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो साप्ताहिक ट्रेंड्स पर नजर रखना आपके लिए फायदेमंद होगा।


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