देश भर में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा हुआ है। इस अचानक हुई बढ़ोतरी से बड़े शहरों में ईंधन के दाम आसमान छूने लगे हैं। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई तेजी को देखते हुए तेल कंपनियों (OMCs) ने रेट्स में यह बदलाव किया है। इस फैसले का सीधा असर आम जनता की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर तुरंत देखने को मिलेगा।
कच्चे तेल की बढ़ती लागत और हाल ही में टैक्स नियमों में हुए बदलावों की वजह से कीमतों में यह संशोधन करना पड़ा है। ज्यादातर राज्यों ने वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) के नए नियम लागू किए हैं, जिसकी वजह से अलग-अलग इलाकों में कीमतों में अलग-अलग बढ़ोतरी हुई है। स्थानीय टैक्स के चलते अब शहरों के बीच तेल की कीमतों में बड़ा अंतर नजर आ रहा है।

पेट्रोल-डीजल में 3 रुपये की बढ़ोतरी: जानें आपके शहर में अब क्या हैं नए रेट्स
आप पेट्रोल पंप पर जो कीमत चुकाते हैं, उसमें लोकल टैक्स का बड़ा हाथ होता है। उदाहरण के लिए, भारी स्टेट लेवी की वजह से मुंबई में तेल की कीमतें काफी ज्यादा हैं। वहीं, दक्षिण भारतीय शहरों के मुकाबले दिल्ली में रेट्स थोड़े कम हैं। देश के प्रमुख महानगरों के ताजा रेट्स आप नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं।
| शहर | पेट्रोल (Rs/L) | डीजल (Rs/L) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 100.47 | 92.62 |
| मुंबई | 109.21 | 97.27 |
| चेन्नई | 105.63 | 96.24 |
| कोलकाता | 106.95 | 93.76 |
महंगाई और लॉजिस्टिक्स पर क्या होगा असर? समझें पूरा गणित
तेल की कीमतों में इस उछाल से लॉजिस्टिक्स और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है। ईंधन महंगा होने का मतलब है कि ग्रॉसरी से लेकर कपड़ों तक की डिलीवरी के लिए अब आपको ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। जानकारों का मानना है कि इस कदम से आने वाले महीनों में रिटेल महंगाई (Retail Inflation) बढ़ सकती है। महंगाई बढ़ने पर अक्सर केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ती हैं।
इस खबर का असर आज शेयर बाजार पर भी साफ दिखा। इनपुट कॉस्ट बढ़ने के डर से एयरलाइंस और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। हालांकि, अगर ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो तेल कंपनियों (OMCs) के मार्जिन में सुधार हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में स्थिरता पूरी तरह से इंटरनेशनल ऑयल ट्रेंड्स पर निर्भर करेगी।
आम उपभोक्ताओं को अब सफर और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के लिए तैयार रहना चाहिए। ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच, स्थानीय ईंधन की कीमतें ही घर का बजट तय करेंगी। भविष्य की प्लानिंग के लिए सरकार की टैक्स नीतियों पर नजर रखना जरूरी होगा। महीने भर के ट्रांसपोर्ट खर्च को मैनेज करने वालों के लिए यह बढ़ोतरी एक बड़ी चुनौती बनकर आई है।


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