15 मई 2026 की सुबह भारतीयों के लिए एक बड़ी खबर लेकर आई। करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ गए हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं, मुंबई में एक लीटर पेट्रोल अब 106.64 रुपये में मिल रहा है, जो पहली बार 106 रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। सुबह 6 बजे से लागू हुई इन नई कीमतों ने उन करोड़ों लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है, जिन्हें अप्रैल 2022 से स्थिर कीमतों की वजह से राहत मिल रही थी।
Petrol Diesel Price Hike: आखिर तेल कंपनियों के पास दाम बढ़ाने के अलावा क्यों नहीं बचा कोई रास्ता?
सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOC), BPCL और HPCL ने अप्रैल 2022 से कीमतों में रोजाना होने वाले बदलाव को रोक दिया था। इसका मकसद रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से घरेलू उपभोक्ताओं को बचाना था। लेकिन अब पश्चिम एशिया (West Asia) में छिड़े संघर्ष ने एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा की तेजी ला दी है। फरवरी में जिस भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 69 डॉलर प्रति बैरल थी, वह युद्ध शुरू होने के बाद से लगातार आसमान छू रही है।

Petrol Diesel New Rates: देश के बड़े शहरों में अब क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद देशभर में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। 14 मई की कीमतों और उसमें हुई 3 रुपये की ताजा बढ़ोतरी के आधार पर देश के प्रमुख शहरों के नए रेट्स यहां देखें:
| शहर | पेट्रोल (बढ़ोतरी से पहले) | पेट्रोल (बढ़ोतरी के बाद) | डीजल (बढ़ोतरी के बाद) |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | Rs 94.77 | Rs 97.77 | Rs 90.67 |
| मुंबई | Rs 103.54 | Rs 106.54 | Rs 93.03 |
| कोलकाता | Rs 105.41 | Rs 108.41 | Rs 95.02 |
| चेन्नई | Rs 100.84 | Rs 103.84 | Rs 95.39 |
| हैदराबाद | Rs 107.50 | Rs 110.50 | Rs 98.70 |
| बेंगलुरु | Rs 102.96 | Rs 105.96 | Rs 93.99 |
पश्चिम एशिया संकट और पेट्रोल-डीजल की महंगाई: क्या है असली वजह?
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) की घेराबंदी हो गई है। यह दुनिया का एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है जहां से करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई होती है। सप्लाई बाधित होने से ऊर्जा की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। 2 मार्च को कच्चे तेल की कीमत 76.16 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 13 मई तक बढ़कर 105.76 डॉलर पहुंच गई—यानी महज ढाई महीने में करीब 38 फीसदी का उछाल।
सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) लागत से कम दाम पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी बेचकर रोजाना 1,600 से 1,700 करोड़ रुपये का घाटा उठा रही थीं। पिछले 10 हफ्तों में यह कुल घाटा 1 लाख करोड़ रुपये के पार जा चुका है। पीटीआई (PTI) के एक सूत्र के मुताबिक, "इसमें कोई शक नहीं कि तेल की कीमतें बढ़ाना अब मजबूरी बन गया था, लेकिन इसकी टाइमिंग और बढ़ोतरी की मात्रा का फैसला सरकार को करना था।"
महंगाई और आपके बजट पर क्या होगा असर?
अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि डीजल महंगा होने का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर 'चेन रिएक्शन' की तरह होगा। चूंकि माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स के लिए डीजल ही मुख्य ईंधन है, इसलिए फल, सब्जी और अनाज जैसी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ना तय है। इससे कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में उछाल आ सकता है। यह चिंता वाजिब भी है क्योंकि अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) पहले ही 8.3 फीसदी पर पहुंच गई थी, जिसमें ईंधन और बिजली क्षेत्र में 24.71 फीसदी की महंगाई दर्ज की गई थी।
भारत में खुदरा महंगाई ईंधन की कीमतों के प्रति बेहद संवेदनशील है क्योंकि ट्रांसपोर्ट का खर्च हर सेक्टर को प्रभावित करता है। पेट्रोल-डीजल के दाम में 2 से 5 रुपये की बढ़ोतरी भी घर के बजट को हिला देती है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एलपीजी के बढ़ते दाम और पेट्रोल की महंगाई दोहरी मार की तरह है, जिसने लंबे समय से चली आ रही स्थिरता को खत्म कर दिया है।
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से पहले पीएम मोदी और RBI ने क्या कहा था?
हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वे गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें और सोना खरीदने की योजना को फिलहाल टाल दें। उन्होंने पब्लिक ट्रांसपोर्ट और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के साथ-साथ वर्क-फ्रॉम-होम और वर्चुअल मीटिंग्स को फिर से अपनाने की सलाह दी ताकि ईंधन की खपत कम हो और विदेशी मुद्रा बचाई जा सके। वहीं, स्विट्जरलैंड में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी आगाह किया था कि अगर मिडिल ईस्ट संकट लंबा खिंचता है, तो सरकार को कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
आगे क्या: क्या और बढ़ेंगे दाम या मिलेगी राहत?
आने वाले समय में कीमतों में और बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सीआईआई (CII) ने सिफारिश की है कि पेट्रोल-डीजल पर दी गई 10 रुपये की केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी कटौती को अगले 6 से 9 महीनों में धीरे-धीरे वापस लिया जाए। जानकारों का मानना है कि महंगाई के अचानक झटके से बचाने के लिए सरकार एक साथ बड़ी बढ़ोतरी करने के बजाय 2 से 4 रुपये की किस्तों में दाम बढ़ा सकती है, ताकि तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई भी हो सके और जनता का गुस्सा भी कम रहे।
ईंधन के इस संकट ने लोगों के व्यवहार में भी बदलाव लाया है। साल 2025-26 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और कारों के रजिस्ट्रेशन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में मेट्रो का इस्तेमाल भी अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया संकट के फिलहाल थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं और तेल कंपनियों की हालत भी नाजुक है, ऐसे में भारतीयों को इस संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए कि आज की 3 रुपये की बढ़ोतरी आखिरी नहीं हो सकती।
More From GoodReturns

Sugar Stocks: चीनी की कीमतों में आग, इन 7 शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग की दमदार रणनीति

Tempsens Instruments IPO: आज से खुला निवेश का मौका, जानें प्राइस बैंड और लॉट साइज की पूरी डिटेल

Kotak Diversified Equity All Cap NFO: आज बंद हो रहा है निवेश का मौका, क्या आपको दांव लगाना चाहिए?

IPO बंद होने का आखिरी मौका: आज शाम 5 बजे से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना अटक सकता है पैसा

Shiprocket Listing Today: शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री! क्या ₹120 के पार खुलेगा भाव?

एयरटेल का नया ₹899 वाला प्लान: क्या ₹859 वाला पैक बंद हो गया? जानें पूरी सच्चाई

शेयर बाजार का नया नियम: 3:15 से 3:40 के बीच बदल जाएगी ट्रेडिंग, F&O ट्रेडर्स ऐसे तैयार करें वॉचलिस्ट

Augmont Enterprises IPO: आज से खुला मौका! ₹788 के शेयर पर दांव लगाएं या रहें दूर?

इनवेस्को इंडिया फार्मा एंड हेल्थकेयर फंड NFO: निवेश से पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें

FINNIFTY एक्सपायरी: आज बाजार में बड़ा बदलाव! CAS टाइमिंग और इन स्टॉक्स पर रखें नजर

इनकम टैक्स रिफंड 'On Hold' है? घबराएं नहीं, इन 5 आसान स्टेप्स से तुरंत पाएं पैसा



Click it and Unblock the Notifications