Food Inflation : चावल खाने को तरस जाएंगे लोग, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली, जून 21। रूस-यूक्रेन के बीच संघर्ष के कारण गेहूं के कीमतों में आई तेजी ने उपभोक्ताओं को सस्ते भोजन के लिए चावल को विकल्प के रूप में चुनने के लिए मजबूर किया है। विश्लेषकों की मानें तो खपत में बढ़ोतरी के कारण देश में चावल के दामों में उछाल आ सकता है। देश में चावल के पर्याप्त स्टॉक और मजबूत उत्पादन के कारण चावल की कीमत अभी स्थिर बनी हुई है। लेकिन, यदि गेहूं के प्रोडक्ट के कीमतों में गिरावट नहीं आती है और ग्राहक चावल पर स्विच करते हैं तो चावल के भंडार में कमी आ सकती है।

चावल के स्टॉक को मॉनिटर कर रही है सरकार

चावल के स्टॉक को मॉनिटर कर रही है सरकार

अगर चावल के स्टॉक में कमी आती है तो सरकार को गेहूं की तरह चावल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है। चावल दुनिया की आधी से अधिक आबादी के लिए प्राथमिक खाद्य पदार्थ है। एशिया में विश्व खपत का 90% चावल उगाया जाता है। इकोनॉमिक टाइम्स के रिपोर्ट के अनुसार सरकार चावल के कीमतों और खपत में आई तेजी को लगातार मॉनिटर कर रही हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस वर्ष मानसून सामान्य रहेगा जिससे चावल का उत्पादन बेहतर होगा। उत्पादन अच्छा हुआ तो चावल भंडार में काफी असर नहीं पड़ेगा और कीमत स्थिर बनी रहेगी।

चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है भारत

चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है भारत

अमेरिका के कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में भारत में चावल का उत्पादन और खपत वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक रहेगा-। इसके अलावा, भारत का चावल निर्यात पिछले साल के मुकाबले 1 मिलियन टन और बढ़कर रिकॉर्ड 22 मिलियन टन होने का अनुमान है। भारत वैश्विक चावल निर्यात का लगभग 41% हिस्सा अकेले निर्यात करता है। इंडिया का अनुमानित निर्यात अन्य तीन बड़े निर्यातक देश थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान के संयुक्त शिपमेंट से अधिक भी है।

कई देशों को निर्यात पर प्रतिबंध का है डर

कई देशों को निर्यात पर प्रतिबंध का है डर

भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है और कई देश चिंतित हैं कि गेहूं और चीनी की तरह अगर भारत चावल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाता है तो उन देशों में भोजन सामग्री संबंधित समस्या बढ़ जाएगी। हालांकि, भारत सरकार ने चावल के निर्यात पर प्रतिबंध न लगाने का आश्वासन दिया है। इस परिदृश्य में अगर देश में चावल की खपत बढ़ती है तो यह खाद्य मुद्रास्फीति की स्थिति को बढ़ा सकता है। भारत दुनिया में गेहूं का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। तेज गर्मी के कारण इस वर्ष देश में गेहूं का उत्पादन कम हुआ था जिसके कारण भारत ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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