केरल के ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को देश के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाता है।
नई दिल्ली: केरल के ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को देश के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाता है। केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन और उसकी संपत्तियों के अधिकारी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट का फैसला पटलते हुए देश के सबसे अधिक संपत्ति वाले मंदिरों में से एक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का प्रबंधन का अधिकार त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार को दिया है।

बता दें कि मंदिर के पास करीब दो लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। इस भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं सदी में इसके मौजूदा स्वरूप में त्रावणकोर शाही परिवार ने कराया था, जिन्होंने 1947 में भारतीय संघ में विलय से पहले दक्षिणी केरल और उससे लगे तमिलनाडु के कुछ भागों पर शासन किया था।
5000 साल पुराना है पद्मनाभस्वामी मंदिर
मंदिर कब बना, इसपर कोई पक्का प्रमाण नहीं मिलता है। इतिहासकार डॉ.एल.के.रवि वर्मा के अनुसार मंदिर लगभग 5000 साल पुराना है, जब मानव सभ्यता कलियुग में पहुंची थी। वैसे मंदिर के स्ट्रक्चर के लिहाज से देखें तो माना जाता है कि केरल के तिरुअनंतपुरम में बने पद्मनाभस्वामी मंदिर की स्थापना सोलहवीं सदी में त्रावणकोर के राजाओं ने की थी। इसके बाद से ही यहां के राजा इस मंदिर को मानते रहे। साल 1750 में महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को पद्मनाभ दास घोषित कर दिया। इसके साथ ही पूरा का पूरा राजघराना मंदिर की सेवा में जुट गया। अब भी शाही घराने के अधीन एक प्राइवेट ट्रस्ट मंदिर की देखरेख कर रहा है।
लॉकडाउन में पद्मनाभस्वामी मंदिर को 6 करोड़ का नुकसान
देश में सबसे अधिक संपत्ति वाले तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभस्वामी मंदिर को लॉकडाउन की अवधि के दौरान करीब छह करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। मंदिर को औसतन हर महीने करीब तीन करोड़ रुपए की आय होती है। मंदिर में ऑनलाइन दान स्वीकार किया जा रहा है मगर ऑनलाइन दान में रोजाना करीब 25 हजार रुपए ही मिल रहे हैं। इससे समझा जा सकता है कि मंदिर की कमाई कितनी घट चुकी है। मंदिर के 307 कर्मचारियों को वेतन के रूप में हर महीने 1.1 करोड़ रुपए दिए जाते हैं। पिछले महीने बैंक में जमा राशि और इस महीने डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज से वेतन बांटा गया है।


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