भारत में बढ़ रही बेरोजगारी दर से लोगों को कब तक मिलेगी राहत, क्या कहती है ORF की रिपोर्ट

India Unemployment Rate : आपकि जानकारी के लिए बता दें भारत एक बड़े आर्थिक और रोज़गार बदलाव के कगार पर है, अनुमानों के अनुसार बेरोज़गारी दरों में अच्छी गिरावट आएगी क्योंकि देश 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) की इंडिया एम्प्लॉयमेंट आउटलुक 2030 रिपोर्ट के अनुसार बेरोज़गारी दर 2024 में 4.47% से घटकर 2028 में 3.68% होने की उम्मीद है।

India Unemployment Rate

यह आशावादी पूर्वानुमान भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि पर आधारित है, जो इसे कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बनाता है।

देश की युवा जनसांख्यिकी जिसकी औसत आयु 28.4 वर्ष है, उसको इस आर्थिक विस्तार के पीछे एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखा जाता है। 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर के साथ भारत 2026-27 तक अपने महत्वाकांक्षी $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर है। यह वृद्धि मजबूत निजी खपत और सार्वजनिक निवेश द्वारा संचालित होने की संभावना है, 2024 में देश का जीडीपी आकार 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से कम होने का अनुमान है।

ओआरएफ रिपोर्ट भारत के रोजगार बाजार की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डालती है, जिसमें देश के अपने आर्थिक लक्ष्य के करीब पहुंचने पर समग्र रोजगार में 22% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

इस सकारात्मक बदलाव का सेवा क्षेत्र से महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जो पर्याप्त रोजगार सृजन के लिए तैयार है। सेवा उत्पादन में मात्र एक इकाई की वृद्धि से रोजगार में 0.12% की वृद्धि हो सकती है, जो भारत के रोजगार परिदृश्य में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

सेवा क्षेत्र में दस उप-क्षेत्रों की पहचान नौकरी के अवसरों के लिए विशेष रूप से आशाजनक के रूप में की गई है। इनमें डिजिटल और वित्तीय सेवाओं से लेकर स्वास्थ्य, आतिथ्य, उपभोक्ता खुदरा, ई-कॉमर्स और नवीकरणीय ऊर्जा आदि शामिल हैं। रिपोर्ट में इन क्षेत्रों में महिलाओं के रोजगार को बढ़ावा देने के महत्व पर भी जोर दिया गया है, जिसमें महिलाओं के कौशल वित्तीय समावेशन और उद्यमिता में और अधिक निवेश का सुझाव दिया गया है।

हालांकि, विनिर्माण क्षेत्र के लिए दृष्टिकोण कम आशावादी है। भारत की कॉम्पटिटर लागत संरचनाओं और श्रम संसाधनों तथा मेक इन इंडिया जैसी सरकारी पहलों के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार में गिरावट देखी गई है।

इसका कारण तकनीकी प्रगति और स्वचालन में वृद्धि है, जिससे बढ़ते कार्यबल को अवशोषित करने की क्षेत्र की क्षमता के बारे में चिंताएं बढ़ रही हैं। सेवा क्षेत्र से जुड़ी औद्योगिक मूल्य श्रृंखलाओं की ओर ध्यान केंद्रित करना रोजगार को बढ़ावा देने का एक संभावित समाधान हो सकता है।

ओआरएफ की रिपोर्ट के अनुसार रोजगार और कौशल अंतर को पाटने के लिए नीति निर्माताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र की योजनाओं और अन्य हितधारकों के बीच सहयोगात्मक नजरिए के महत्व पर जोर दिया। उनका सुझाव है कि भारत के प्रतिभा पूल को उद्योग के लिए अधिक तैयार बनाना और उद्यमियों के एक नए वर्ग को बढ़ावा देना रोजगार सृजन और नवाचार में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। घोष यह भी सुनिश्चित करने का आह्वान करते हैं कि भविष्य के कार्यस्थल लिंग-संवेदनशील और समावेशी हों।

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