नयी दिल्ली। क्या आप टैक्स देते हैं? अगर हां तो आपने कभी सोचा है कि भारत में कुल कितने लोग टैक्स भरते हैं। आप जान कर हैरानी होगी देश की आबादी का सिर्फ 1 फीसदी हिस्सा टैक्स भरता है। इस बात की जानकारी केंद्र सरकार की तरफ से संसद में दी गई है। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि फरवरी 2020 तक वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए व्यक्तिगत करदाताओं की तरफ से 5.78 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल किए गए, जिसमें से केवल 1.46 करोड़ व्यक्तिगत करदाताओं ने 5 लाख रु से ऊपर की इनकम घोषित की। फाइनेंस एक्ट 2019 में कहा गया है कि 5 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तिगत करदाताओं को आकलन वर्ष 2020-21 के बाद से किसी टैक्स का भुगतान नहीं करना है। इस बीच टैक्स चोरी देश में टैक्स कलेक्शन के लिए एक बहुत बड़ी बाधा बनी हुई है।
जानिए सरकार ने क्या उठाए कदम
ठाकुर ने बताया कि सरकार ने टैक्स चोरी का समय पर पता लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा सर्च और जब्ती, सर्वेक्षण, पूछताछ, आय का आकलन, टैक्स का जुर्माना, दंड और आपराधिक अदालतों में अभियोजन शिकायतों को दाखिल करना, जहां भी लागू हो, जैसे कदम प्रत्यक्ष कर कानूनों के अनुसार उठाए गए हैं। उधर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स चोरी का पता लगाने के लिए कई तकनीकी चीजें डेवलप की हैं। इनमें छानबीन के मामलों के चयन के लिए कंप्यूटर असिस्टेड स्क्रूटिनी सिलेक्शन (सीएएसएस) जैसे महत्वपूर्ण उपाय शामिल हैं। इसके अलावा टैक्स न देने वालों पर कार्रवाई को प्राथमिकता देने के लिए नॉन-फाइलर मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) और आयकर व्यापार अनुप्रयोग (आईटीबीए) शामिल है।
पैन को किया जरूरी
सरकार ने टैक्स चोरी की जांच के लिए आयकर अधिनियम, 1961 में कई लेजिस्लेटिव प्रोविजन पेश किए हैं। इनमें पैन को अनिवार्य किया जाना शामिल है। इसके अलावा 2 लाख रुपये या उससे अधिक के नकद लेनदेन पर रोक, किसी वित्तीय वर्ष के दौरान एक या अधिक खातों से किसी व्यक्ति द्वारा एक करोड़ रुपये से ज्यादा कैश निकालने पर 2 फीसदी टीडीएस लगाए जाने का प्रावधान किया है। नकद लेन-देन पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। यहां तक की दान की रकम कैश में अगर 2000 रु ज्यादा है तो उसमें अधिनियम की धारा 80 जी के तहत कोई छूट नहीं होगी।
राजनीतिक पार्टियों पर भी नजर
राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग में पारदर्शिता लाना, डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करना, दोहरे कराधान से बचाव समझौतों (डीटीएए), कर सूचना विनिमय समझौतों के तहत सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए विदेशी सरकारों से बातचीत करना, विदेशी संपत्तियों के मामलों में प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई और आधार और पैन को अनिवार्य रूप से जोड़ना ये वो उपाय हैं जो टैक्स चोरी को रोकने के लिए शुरू किए गए हैं।
5 करोड़ रु से ज्यादा इनकम वाले लोग
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस साल की शुरुआत में जानकारी दी थी कि पूरे देश में 5 करोड़ रुपये से अधिक की आय का खुलासा करने वाले व्यक्तिगत करदाताओं की संख्या 8,600 के आसपास थी। सीबीडीटी ने यह भी कहा था कि 2200 डॉक्टरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, वकीलों और अन्य पेशेवरों ने 1 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक आय का खुलासा किया।
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