ऑनलाइन गेम पर सरकार की सख्ती! अब पैसों से जुड़े गेमिंग ऐप को नहीं कर पाएंगे डाउनलोड

भारत में ऑनलाइन गेमिंग का कारोबार पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। लाखों लोग रोज़ाना मोबाइल और कंप्यूटर पर अलग-अलग गेम खेलते हैं। लेकिन इनमें से कई गेम्स ऐसे हैं जिनमें असली पैसे लगाए जाते हैं और जीत-हार से खिलाड़ियों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

इसी खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को लोकसभा ने ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन बिल 2025 पास कर दिया। इस कानून का मकसद है गेमिंग सेक्टर को नियमों के दायरे में लाना और युवाओं को जुए की लत से बचाना।

Online Gaming Apps Bans

पैसे वाले गेम्स होंगे बंद

कानून के मुताबिक, अब रियल मनी गेम्स जैसे फैंटेसी स्पोर्ट्स, पोकर, रमी और ऑनलाइन लॉटरी को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि ऐसे खेल युवाओं में लत और कर्ज की बड़ी वजह बन रहे थे।

विज्ञापन और लेन-देन पर भी बैन

बिल में केवल गेम्स ही नहीं बल्कि उनके प्रचार-प्रसार पर भी रोक लगाई गई है। यानी अब टीवी, अखबार या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन जुए वाले विज्ञापन नहीं दिखेंगे। इतना ही नहीं, बैंक और वित्तीय संस्थानों को भी ऐसे गेम्स से जुड़े लेन-देन की सेवाएं देने से मना कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसे गेम्स खेलना भी चाहे, तो उसके लिए पैसों का लेन-देन करना मुश्किल होगा।

जेल और जुर्माने का प्रावधान

अगर कोई भी कंपनी या व्यक्ति पैसे लगाकर खेलाए जाने वाले गेम्स ऑफर करता है तो उसे तीन साल तक की कैद और/या एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स रहेंगे जारी

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कानून सभी गेम्स पर लागू नहीं होगा। ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स, जिनमें पैसों का दांव नहीं होता, उन्हें खेलने पर कोई रोक नहीं है। ऐसे गेम्स सब्सक्रिप्शन या विज्ञापन आधारित मॉडल पर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

युवाओं की सुरक्षा पर ध्यान

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार का सबसे बड़ा मकसद युवाओं की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना है। उनका कहना है कि गेमिंग को केवल मनोरंजन और स्किल डेवलपमेंट तक सीमित रहना चाहिए, न कि आर्थिक नुकसान की वजह बनना चाहिए।

बड़ा असर पड़ सकता है

इस बिल के लागू होने के बाद कई बड़ी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों का बिज़नेस प्रभावित होगा। खासकर वे प्लेटफॉर्म जो पैसे वाले गेम्स पर चलते थे, उन्हें या तो अपना मॉडल बदलना होगा या फिर कारोबार बंद करना पड़ेगा। दूसरी तरफ, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने में मददगार साबित होगा।

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