नए साल में म‍िलेगा चीनी प्‍याज का स्‍वाद, जानि‍ए कैसे?

प्याज की कीमतों में जारी तेजी अब थम सकती है। अब तक भारतीय बाजार चीनी खिलौनों और लाइटों से सजी रहती थी। लेकिन जल्‍द ही अब चीन से प्‍याज भी मिलेगा।

नई द‍िल्‍ली: प्याज की कीमतों में जारी तेजी अब थम सकती है। अब तक भारतीय बाजार चीनी खिलौनों और लाइटों से सजी रहती थी। लेकिन जल्‍द ही अब चीन से प्‍याज भी मिलेगा। जी हां आने वाले नए साल में भारतीय बाजारों में अब चीन से प्‍याज आएगा। घरेलू बाजार में 80 रुपये और 100 रुपये प्रति किलो के बीच मंडराते हुए लगातार प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने चीन से प्‍याज आयात करने का फैसला किया है।

Onions Will Come From China In This New Year

प्‍याज 70 रुपये से 80 रुपये रहने की संभावना
जानकारी के मुताबकि पता चला है कि सार्वजनिक ट्रेडिंग एजेंसी मेटल्स एंड मिनरल्स ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (एमएमटीसी) ने पिछले हफ्ते प्याज का 11,000 मीट्रिक टन (एमटी) आयात करने के लिए एक वैश्विक निविदा जारी की है, जिसमें से 4,000 मीट्रिक टन चीन को और 7,000 मीट्रिक टन तुर्की को दिए गए थे। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्याज 31 जनवरी 2020 तक भारत आने वाला है। अधिकारी ने यह भी कहा कि प्याज की कीमत भारत में 70 रुपये से 80 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहने की संभावना है।

सरकार ने नीदरलैंड, मिस्र, ईरान, तुर्की और रूस से सब्जी आयात करने के आदेश भी दिए थे। नवंबर में, एमएमटीसी, जो मुख्य रूप से धातुओं और खनिजों के आयात और निर्यात में काम करता है, को उत्पादन में गिरावट के बाद 120 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की कीमतों के बाद प्याज की खरीद करने के लिए कहा गया था। वहीं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों ने दो प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात में इसकी कम आपूर्ति के लिए अतिरिक्त बारिश को जिम्मेदार ठहराया।

महंगी प्‍याज के कारण नहीं घटी ब्याज दरें
वहीं दूसरी ओर आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की इस महीने के आरंभ में हुई बैठक के मिनट्स हाल ही में जारी हुए हैं। इससे यह जाहिर है कि एमपीसी के सदस्य प्याज के दाम में वृद्धि को लेकर चिंतित थे। इसका कारण खुदरा महंगाई में भारी इजाफा था, जिसमें प्याज का रोल अहम था। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में केंद्रीय बैंक ने प्रमुख ब्याज दर यानी रेपो रेट में कटौती का इस साल जो सिलसिला शुरू हुआ, उस पर दिसंबर में ही आकर विराम लगा। हालांकि इस साल आरबीआई ने रेपो रेट में 135 आधार अंकों की कटौती कर चुका है।

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