नई दिल्ली, अगस्त 2। देश में प्रत्येक वर्ष अगस्त से नवंबर के बीच प्याज की किल्लत बढ़ जाती है और प्याज के पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने के कारण मंडियों से लेकर उपभोक्ता मंडियों के बीच आपूर्ति का समस्या बनी रहती है, मगर इस बार इस तरह की समस्या नहीं है। भारत में प्याज जरूरत के हिसाब की उपलब्ध है और निर्यात की मांग भी नही है। प्याज की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए भारत सरकार ने ढाई लाख टन का बड़ा स्टॉक बना रखा है, जो मार्केट में बढ़ती प्याज की कीमतों को काबू करने के लिए काफी है।
जमाखोरी के कारण भाव में वृद्धि होती है
हर साल देश में अगस्त महीने के खत्म होते होते रबी सीजन की प्याज का स्टॉक भी खत्म होने लगता है। जिस वजह से कई लोग प्याज को स्टॉक करके रखने लगते है। जिस कारण प्याज के दाम बढ़ जाते है फिर वे उसको महंगे में बेचने लगते है।
विदेशों में प्याज का निर्यात प्रभावित हुआ
विदेशी बाजारों में प्याज के अच्छे भाव देखते हुए। इस वर्ष प्याज का अच्छा निर्यात नही हुआ है। श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण प्याज का निर्यात प्रभावित हुआ है जबकि भारतीय प्याज के सबसे बड़े आयातक देश बांग्लादेश ने प्याज आयात पर सीमा शुल्क बढ़ा दिया है। ऐसे ही रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण पैदा हुई। स्थितियों में प्याज के पाउडर और सूखे प्याज का निर्यात को भी बीस प्रतिशत ज्यादा प्रभावित देखा गया है।
प्याज का उत्पादन 311 लाख टन होने का संभावना
वर्ष 2021-22 चालू हार्टिकल्चर के दौरान प्याज का उत्पादन 311 लाख टन होने का संभावना लगाया गया है, ये संभावना पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा है। इसी कारण प्याज का भाव बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों ने सरकार से प्याज निर्यात को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है।


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