नयी दिल्ली। वन नेशन वन राशन कार्ड मोदी सरकार की बहुत अहम योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत पूरे देश में एक ही राशन कार्ड चलेगा। राशन कार्डधारक एक ही राशन से पूरे देश में कहीं से भी राशन हासिल कर सकेंगे। इस योजना से सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों को होगा, जो काम की तलाश में एक से दूसरे राज्यों में जाते हैं। अभी उन्हें दूसरे राज्य में अपने राशन कार्ड से अनाज नहीं मिल पाता, मगर वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत वे किसी भी राज्य में राशन हासिल कर सकेंगे। ये योजना 1 जुलाई से शुरू हो चुकी है। 31 जुलाई से पहले राशन कार्डधारकों को आधार कार्ड से जुड़ा एक जरूरी काम निपटाना है।
20 राज्यों में हुई शुरुआत
वन नेशन वन राशन कार्ड योजना धीरे-धीरे पूर देश में लागू की जा रही है। अब तक कुल 20 राज्य इस नयी योजना को लागू करने पर सहमत हो चुके हैं। ध्यान रहे कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए राशन कार्ड को आधार से लिंक कराना जरूरी है। आपको 31 जुलाई तक अपने राशन कार्ड और आधार को लिंक कराना जरूरी है। इस काम के लिए 31 जुलाई अंतिम तारीख तय की गयी है। अगर आपने अभी तक राशन कार्ड और आधार को लिंक नहीं कराया है तो फटाफट ये काम निपटाएं। आप इस काम के लिए राशन देने वाले की दुकान पर आवेदन कर सकते हैं।
क्या-क्या चाहिए डॉक्यूमेंट
राशन कार्डधारक को आधार लिंक के लिए अपने आधार के अलावा परिवार के बाकी सदस्यों के आधार की कॉपी और अपने राशन कार्ड की कॉपी जमा करनी होगी। इसके साथ में परिवार के मुखिया की पासपोर्ट साइज फोटो भी दी जानी जरूरी है। इन डॉक्यूमेंट के अलावा पीडीएस अधिकारी आपको बॉयोमेट्रिक मशीन या सेंसर पर उंगली रख कर डिटेल और आधार नंबर को मैच करेंगे। इसके बाद आपके डॉक्यूमेंट स्वीकार करने के बाद रिजस्टर्ड मोबाइल नंबर पर राशन कार्ड से आधार के लिंक होने का मैसेज भेज दिया जाएगा।
गरीब अन्न कल्याण योजना
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्ना योजना (पीएमजीकेएवाई) एक कल्याणकारी योजना है, जिसे केंद्र सरकार ने मार्च 2020 में शुरू किया। पीएमजीकेएवाई के तहत अनाज लेने के लिए राशन कार्ड की जरूरत नहीं। केवल आधार से ही आपको राशन मिलेगा। इस योजना से देश के 80 करोड़ जरूरतमंद लोगों को फायदा मिलेगा। इस योजना की घोषणा 26 मार्च 2020 को तब की गई थी, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी के मद्देनजर राष्ट्र को दिए गए पहले भाषण में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का ऐलान किया था। शुरुआत में ये योजना अप्रैल से जून 2020 तक के लिए शुरू की गई थी, जिस पर 1.70 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने की बात कही गई थी। पीएम मोदी के 30 जून को राष्ट्र के नाम संबोधन में इस योजना को नवंबर 2020 तक के लिए आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई।
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