Second Hand Cars Market: चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत इस समय दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन चुका है। यहां की कुल आबादी 140.76 करोड है। अब लोग खरीदने के चक्कर में पुरानी गाड़ियां बेचने मेंलगे हुए हैं। जहां अमेरिका और चीन में 80 से 90 परसेंट लोगों के पास अपनी खुद की कर है, वहीं भारत की आबादी में से सिर्फ 8 प्रतिशत लोगों के पास ही अपनी खुद की कार है। ऐसे में जिन लोग की तनख्वाह थोड़ी कम है वह पुरानी कारों को खरीद कर अपने शौक पूरे करते हैं।
वहीं लोगों की बदली मानसिकता की वजह से भी सेकंड हैंड कर का बिजनेस इतनी जबरदस्त तेजी से बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले 10 सालों में सेकंड हैंड कार के बिजनेस का मार्केट 8 लाख करोड़ रुपए का होगा।

आने वाले समय में भारत में कारों की संख्या और भी ज्यादा बढ़ाने वाली है। आपकी जानकारी के लिए बताते चले की युवा पीढ़ी की नई सोच और ज्यादा बेहतर बाइंग कैपेसिटी सेकंड हैंड कर के बिजनेस को और भी तेजी से बढ़ा रही है। क्योंकि अब लोग आमतौर पर 4 से 5 साल के अंदर अपनी कर बदल देते हैं और दूसरी गाड़ी पर स्विच कर जाते हैं। लेकिन पहले ऐसा नहीं था और लोग कम से कम 12 से 15 साल तक एक ही गाड़ी को इस्तेमाल करते थे।
भारत में जिन लोगों की सैलरी 60 हजार रुपए से लेकर 2 लाख रुपए प्रति महीना तक है, अगर वह कर के शौकीन है तो अक्सर कम कीमत में बढ़िया सेकंड हैंड कर खोजते हैं, इसके अलावा जिसे नई कर लेनी होती है वह अपनी सेकंड हैंड कर को अच्छी कीमत पर बेचकर उसे पैसे को नई कर में इन्वेस्ट कर देता है। यही कारण है कि भारत में सेकंड हैंड कर का बिजनेस धीरे-धीरे पड़ता जा रहा है जो आने वाले 10 सालों में 8 लाख करोड रुपए तक का हो सकता है।
कार्स 24 के के को फाउंडर और सीईओ विक्रम चोपड़ा ने भी यह बात कही है, कि अब कर को लेकर बाजार में काफी बदलाव आ रहा है और ग्राहक लगातार अपनी गाड़ियां बदल रहे हैं।
चोपड़ा ने मीडिया एजेंसी से बात करते हुए कहा है कि कार्स 24 के द्वारा किए गए उनके द्वारा एक आंतरिक अध्ययन भी किया गया है, जिसके तहत भारत में पुरानी कारों का बिजनेस हर साल 15 प्रतिशत की तेजी से बढ़ने वाला है।
कार्स 24 के द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि साल 2023 में पुरानी कारों का बिजनेस 25 अरब डॉलर का रहा है। जो साल 2034 तक बढ़कर 100 अरब डालर तक का हो जाएगा। कंपनी ने बताया है कि इस मार्केट को बढ़ाने में कई फैक्टर काम करेंगे जिनमें अर्बनाइजेशन, बढ़ती मिडिल क्लास साइज और कस्टमर की प्रायोरिटी में बदलाव शामिल हैं। इसके अलावा सस्ती गाड़ियों की मांग बढ़ना भी सेकंड हैंड कार के मार्केट के बढ़ने का एक कारण है।
आपकी जानकारी के लिए बता दे की कार्स 24 का बिजनेस पुरानी कारों को बेचने का है। यह कंपनी आज से करीब 8 साल पहले शुरू की गई थी और उसे समय और कर का मार्केट मात्र 10 से 15 अरब के डॉलर के बीच का था। हालांकि अब यह 25 अरब डॉलर का हो गया है और धीरे-धीरे इसकी वैल्यूएशन बढ़ती ही जा रही है। चोपड़ा ने बताया कि उनके अनुसार पिछले तीन से चार साल में अलग-अलग तरह की कर आने से इस मार्केट में सच में काफी तेजी आई है।
फिलहाल भारत में विकसित देशों के मुकाबले लोगों के पास पर्सनल कार की संख्या काफी कम है और यही कारण है कि यह बिजनेस आगे आने वाले समय में और बढ़ता रहेगा।
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