OIL Crisis: मध्य पूर्व में जारी तनाव और बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का असर अब सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी नजर आने लगा है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार बढ़ने से कई उद्योगों की लागत बढ़ गई है, इससे फूड प्रोसेसिंग सेक्टर भी प्रभावित हुए हैं। कंपनियों के लिए अब मुनाफा बचाना और ग्राहकों पर लागत का बोझ डालने के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। हालांकि कुछ समय के लिए कीमतें 100 डॉलर के नीचे आई थीं, लेकिन फिर तेजी से उछलकर दोबारा 100 डॉलर के पार पहुंच गईं। भारत के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इंडियन बास्केट का औसत भाव मार्च में 123 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर दर्ज किया गया, जो फरवरी के मुकाबले काफी अधिक है।
कंपनियां बढ़ा सकती है कीमतें-
फूड प्रोसेसिंग कंपनियों का कहना है कि अभी तक वे बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठा रही हैं, लेकिन ऐसी स्थिति को ज्यादा समय तक कायम रहना मुश्किल है। अगर मध्य पूर्व में संकट लंबा खिंचता है, तो कंपनियों को मजबूरन अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। जिससे आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
डेयरी,पैकेज्ड फूड सेक्टर में भी हलचल-
डेयरी और पैकेज्ड फूड सेक्टर भी इससे अछूते नहीं हैं। इनपुट लागतों में बढ़ने के चलते कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है और संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में इसका कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुँच सकता है। मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स में बढ़ती लागतों ने उद्योग की चिंता और बढ़ा दी है।
20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ी है लागत-
उद्योग से जुड़े एक्सपर्टस के अनुसार, केवल ट्रांसपोर्ट ही नहीं बल्कि पैकेजिंग मैटेरियल की लागत भी 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है। सप्लाई चेन में संभावित दिक्कतों के चलते खाद्य तेलों की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है। हालांकि फिलहाल कंपनियां स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन अगर यह संकट लंबा चला, तो खुदरा बाजार में कीमतों का बढ़ना तय माना जा रहा है।


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