National Sample Survey: राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) का वार्षिक मॉड्यूलर सर्वेक्षण 2022-23 का डेटा सामने आ गया है। कर्नाटक पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत भर में विभिन्न सामाजिक-आर्थिक फैक्टर्स पर नजर डालता है। सर्वे से सबसे चौंकाने वाली बात राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच शैक्षिक विभाजन पर आई है।

सर्वे में दी गई ये जानकारी
इस सर्वे में ये बात सामने आई है कि बेंगलुरु जैसे केंद्रों में, जो अपनी शैक्षिक सुविधाओं के लिए प्रसिद्ध हैं, यहां 25 साल और उससे अधिक आयु के 56.6% व्यक्तियों ने कम से कम कुछ माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की है, जो राष्ट्रीय ऐवरेज से अधिक है।
इस सर्वेक्षण में गांवों और शहरी ब्लॉकों में 15,298 प्राथमिक यूनिट को शामिल किया गया, जिसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा खर्च, डिजिटल साक्षरता, फाइनेंशियल इंक्लूशन और अन्य पर डेटा एकत्र करना था, जिसमें 3.02 लाख से अधिक घरों को शामिल किया गया। इस डेटा कर्नाटक में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच असमानताओं को उजागर किया है, खासकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के मामले में।
रिपोर्ट से एक चिंताजनक जानकारी यह है कि कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में 25 साल और उससे अधिक आयु के केवल 30% लोगों ने माध्यमिक शिक्षा पूरी की है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय ऐवरेज और राज्य की शहरी शिक्षा प्राप्ति दर 56% से काफी कम है। सर्वेक्षण ग्रामीण-शहरी शिक्षा अंतर को दिखाया है, जो ग्रामीण शिक्षा के बुनियादी ढांचे में केंद्रित सुधार की आवश्यकता को भी दिखाता है।
89% शहरी लोगों के पास है इंटरनेट एक्सेस
कर्नाटक ने फाइनेंशियल इंक्लूशन और शहरी शिक्षा के क्षेत्रों में सराहनीय प्रदर्शन किया है। राज्य की 18 साल और उससे अधिक आयु की लगभग 94.6% आबादी के पास बैंक खाता है या मोबाइल मनी सेवाओं तक उनकी पहुंच है, जो राष्ट्रीय प्रवृत्ति के अनुरूप है। हालांकि, इंटरनेट की पहुंच में डिजिटल विभाजन स्पष्ट है, जहां 89% शहरी निवासियों के पास इंटरनेट की पहुंच है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 67.2% है।
यह अंतर आईसीटी कौशल तक भी फैला हुआ है, जहां ग्रामीण युवाओं का प्रतिशत उनके शहरी समकक्षों की तुलना में अटैचमेंट के साथ ईमेल भेजने जैसे कार्यों में कम कुशल है।
कर्नाटक के युवाओं का Literacy Rate
ग्रामीण और शहरी कर्नाटक के बीच असमानता स्वास्थ्य सेवा व्यय में और भी उजागर होती है, जहां ग्रामीण परिवार अस्पताल में भर्ती होने पर सालाना औसतन 4,129 रुपये खर्च करते हैं, जो शहरी परिवारों के लगभग बराबर है जो 5,290 रुपये खर्च करते हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती कॉमर्शियल स्वास्थ्य सेवा की कमी को दर्शाता है। एक अच्छी बात यह है कि कर्नाटक के 15-24 वर्ष के युवाओं में साक्षरता दर(Literacy rate) आशाजनक है, जहां 97.8% पुरुष और 95.9% महिलाएं सरल वाक्यों को पढ़ने और समझने में सक्षम हैं।
ये साक्षरता स्तर, मुख्य रूप से बचपन की शिक्षा पहल और शहरों में माध्यमिक और उच्च शिक्षा तक बेहतर पहुंच के कारण, राष्ट्रीय मानकों को पूरा करते हैं।
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