नई दिल्ली, जनवरी 8। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी किए अग्रिम अनुमानों के मुताबिक पिछले साल 7.3 फीसदी गिरावट के आधार प्रभाव (बेस इफेक्ट) के सहारे चालू वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की अर्थव्यवस्था के 9.2 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। मजबूत ग्रोथ रियल जीडीपी को वित्त वर्ष 2019-20 के प्री-कोविड लेवल से 1.3 फीसदी ऊपर पहुंचा देगी। मगर आंकड़ों में उपभोक्ता तनाव और कॉन्टैक्ट वाली सर्विसेज में कमजोरी की बात भी कही गयी है। जीडीपी में अनुमानित वृद्धि भारतीय रिज़र्व बैंक के पिछले महीने 9.5 प्रतिशत की तीसरी लहर से पहले के अनुमान से कम है।

अर्थशास्त्रियों ने कम किया अनुमान
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश प्राइवेट अर्थशास्त्रियों ने इस सप्ताह कोविड के मामलों में वृद्धि के बाद चालू वित्त वर्ष के लिए अपने ग्रोथ पूर्वानुमान को कम कर दिया था। नॉमिनल जीडीपी चालू वर्ष के बजट अनुमान के मुकाबले मौजूदा वर्ष में 17.6 फीसदी बढ़ने का अनुमान है, जो उच्च मुद्रास्फीति की तरफ इशारा है। वित्त वर्ष 2020-21 में 6.2 फीसदी की गिरावट की तुलना में सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) 8.6 फीसदी बढ़ने का अनुमान है।
आरबीआई के अनुमान
आरबीआई ने तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2021) और चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2022) के लिए क्रमशः 6.6 प्रतिशत और 6 प्रतिशत ग्रोथ रेट रहने का अनुमान लगाया है। अप्रैल-जून 2021 में 20.1 फीसदी की तेज उछाल के बाद जुलाई-सितंबर 2021 में वास्तविक जीडीपी 8.4 फीसदी बढ़ी थी। एनएसओ के अनुमान के अनुसार खर्चों में देखें तो सरकार के फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर के वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में 7.6 प्रतिशत अधिक और वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में 10.7 प्रतिशत अधिक बढ़ने का अनुमान है। साथ ही जैसा कि तेज ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (जीएफसीएफ) से संकेत मिलता है निवेश गतिविधि में भी तेजी की उम्मीद है। जीएफसीएफ 2020-21 की तुलना में 2021-22 में 14.9 प्रतिशत और 2019-20 की तुलना में 2.6 प्रतिशत अधिक रह सकता है।


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