नई दिल्ली, फरवरी 19। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) और चीफ एग्जेक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) चित्रा रामकृष्ण को एक समय मार्केट में 'एक्सचेंजों की रानी' कहा जाता था। मगर आज वे अपने ऊपर लगे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रही हैं। चित्रा रामकृष्ण पर आरोप है कि अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक वे एनएसई के एमडी और सीईओ के रूप में कार्यरत रहीं और इस दौरान उन्होंने एक 'हिमालयी योगी' के साथ एनएसई की गोपनीय जानकारी साझा की। इतना ही नहीं एनएसई के कई महत्वपूर्ण फैसलों पर योगी की सलाह को तरजीह दी। उनके खिलाफ सेबी, सीबीआई और आयकर विभाग ने कार्रवाई की है।
लुकआउट नोटिस जारी
सीबीआई ने चित्रा रामकृष्ण से शुक्रवार को पूछताछ की। सीबीआई ने चित्रा सहित एक अन्य पूर्व एनएसई सीईओ रवि नरेन और पूर्व चीफ ऑपरेशनल ऑफिसर आनंद सुब्रमणियन के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है। इससे ये तीनों लोग देश नहीं छोड़ सकते। सीबीआई के अनुसार दिल्ली स्थित ओपीजी सिक्योरिटीज के प्रमोटर संजय गुप्ता भी को-लोकेशन मामले में आरोपी हैं। सीबीआई की एफआईरी में कहा गया है कि वे पहले शख्स थे, जिन्हें बाकी शेयर ब्रोकर्स के मुकाबले थोड़ा पहले एक्सचेंज के सर्वर का एक्सेस प्राप्त हो जाता था।
कहां से शुरू हुआ सफर
चित्रा का करियर 1985 में आईडीबी बैंक के साथ शुरू हुआ था। वे बैंक में प्रोजेक्ट फाइनेंस में जुड़ी थीं। 1992 में एनएसई की शुरुआत से ही वे इसमें शामिल रहीं। 2013 में फॉर्च्यून 50 की लिस्ट में टॉप पावरफुल महिलाओं में चित्रा को भी शामिल किया गया था। फिर दिसंबर 2016 में उन्होंने एनएसई को छोड़ दिया। इस समय 3 साल बाद को-लोकेशन मामले में सेबी ने मई 2019 में एनएसई पर 600 करोड़ रु से अधिक जुर्माना ठोका।
2010-11 में भी हुई गड़बड़
सेबी के अनुसार कई लोगों को को-लोकेशन (समय से पहले एक्सचेंज का एक्सेस मिलना) सुविधा देकर एनएसई ने 2010-11 के दौरान काफी मुनाफा कमाया। कहा गया है कि ये फायदा 624 करोड़ रु का रहा था। सेबी को जनवरी से अगस्त 2015 के दौरान भी कई शिकायतें मिली थीं। इस बीच कथित रहस्मयी योगी को लेकर भी मामला गंभीर होता जा रहा है।
क्या है चित्रा का दावा
सेबी ने कहा है कि चित्रा ने हिमालय में रहने वाले आध्यात्मिक गुरु के साथ एनएसई की काफी जानकारी साझा की है। इसमें वित्तीय अनुमान, व्यावसायिक योजनाएं और बोर्ड के एजेंडे शामिल हैं। इसके लिए उन पर 3 करोड़ रु का जुर्माना भी लगा है। चित्रा ने कहा कि हिमालयी योगी ने उनका 20 सालों से अधिक समय तक पर्सनल और बिजनेस मामलों में मार्गदर्शन किया। मगर उनका दावा है कि उनकी योगी से से व्यक्तिगत रूप से कभी मुलाकात नहीं हुई।
मुलाकात को लेकर संदेह
एक रिपोर्ट के अनुसार अज्ञात योगी और रामकृष्ण के बीच ई-मेल कम्युनिकेशन के आधार पर माना जा रहा है कि अज्ञात व्यक्ति और रामकृष्ण 2015 में कई बार मिले। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार सेबी ने आरोप लगाया कि रामकृष्ण और उनके एडवाइजर रहे आनंद सुब्रमण्यम ने एनएसई में कार्यकाल के दौरान मनी-मेकिंग स्कीम चलाई थी।


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