Nifty Expiry Day: टूट गई NSE की 25 साल की परंपरा! जानें कब-कब क्या हुआ; निवेशकों पर क्या होगा असर | EXPLAINER

NSE Nifty Expiry Day, Futures And Options Trading: भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो दशक से अधिक समय से देखें तो कई अहम बदलाव देखने को मिले हैं। अब बदलाव की इस कड़ी में आज यानी मंगलवार 2 सितंबर से एक ऐसा बदलाव हुआ है जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था।

NIFTY Expiry Day

दरअसल, मंगलवार (2 सितंबर) को शेयर बाजार खुलने के साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में एक बड़ा बदलाव हुआ और इसके साथ एनएसई की 25 साल पुरानी एक परंपरा या व्यवस्था खत्म हो गई। मंगलवार से एनएसई ने 25 साल बाद निफ्टी फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी का दिन (NSE Nifty Expiry Day) बदल दिया है। अब F&O कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी गुरुवार से बदलकर मंगलवार कर दिया गया है।

NSE ने 28 अगस्त को इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया था और बताया था कि सभी नए और मौजूदा F&O कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी मंगलवार को होगी। एनएसई का यह बदलावल भारतीय डेरिवेटिव्स बाजार के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है।

F&O के किन कॉन्ट्रेक्ट्स पर होगा इसका असर?

एनएसई का यह बड़ा बदलाव निफ्टी के वीकली, मंथली, तिमाही और अर्ध-वार्षिक कॉन्ट्रैक्ट्स के अलावा बैंक निफ्टी, फिन निफ्टी, मिडकैप निफ्टी, निफ्टी नेक्स्ट50 और सभी सिंगल-स्टॉक डेरिवेटिव्स पर लागू होगा।

अब तक निफ्टी और स्टॉक डेरिवेटिव्स के वीकली कॉन्ट्रैक्ट्स हर गुरुवार को समाप्त होते थे जबकि मंथली, तिमाही और अर्ध-वार्षिक कॉन्ट्रैक्ट्स महीने के आखिरी गुरुवार को खत्म होते थे।


NSE के इतिहास में एक्सपायरी पर कब-कब और क्या हुआ?

NSE पर एक्सपायरी का इतिहास बहुत पुराना है। इसकी शुरुआत 12 जून 2000 को निफ्टी इंडेक्स फ्यूचर्स की शुरुआत के साथ हुई थी। इसके तहत मासिक कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी दिन महीने की आखिरी गुरुवार तय किया गया था। यह नियम जून 2005 में बैंक निफ्टी की शुरुआत के साथ तक जारी रहा।

वहीं, मई 2016 में बैंक निफ्टी के वीकली ऑप्शंस की शुरुआत हुई और इनकी भी एक्सपायरी गुरुवार तय की गई थी। हालांकि, सितंबर 2023 में बैंक निफ्टी की वीकली एक्सपायरी दिन को बदलकर बुधवार कर दिया गया।

इसके अलावा बड़े बदलाव होते हुए जनवरी 2025 में मासिक और तिमाही बैंक निफ्टी की एक्सपायरी फिर से गुरुवार की गई लेकिन मार्च 2025 में इसे सोमवार कर दिया गया।

सितंबर 2023 में बैंक निफ्टी की साप्ताहिक समाप्ति बुधवार की गई और फिर मई 2025 में सेबी ने एक्सचेंजों को एक्सपायरी को मंगलवार या गुरुवार को रखने का आदेश दिया। इसके बाद, NSE ने अगस्त 2025 के अंत में घोषणा की थी कि सभी F&O कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी, चाहे वो साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक हो या अर्धवार्षिक - गुरुवार की बजाय मंगलवार को होंगी।

यह व्यवस्था 1 सितंबर, 2025 से पूरी तरह लागू हो गई। जहां NSE की एक्सपायरी मंगलवार को हो गई है। बता दें कि BSE ने गुरुवार को एक्सपायरी का दिन फिक्स किया है।


F&O की शुरुआत कब हुई?

NSE ने 2000 में डेरिवेटिव्स सेगमेंट की शुरुआत की थी। 12 जून 2000 को निफ्टी इंडेक्स फ्यूचर्स, 4 जून 2001 को इंडेक्स ऑप्शंस, 2 जुलाई 2001 को स्टॉक ऑप्शंस और 9 नवंबर 2001 को स्टॉक फ्यूचर्स की शुरुआत की गई। तब से गुरुवार को 'एक्सपायरी डे' के रूप में जाना जाता था।

कैसे शुरु ही एक्सपायरी का कॉन्सेप्ट?

NSE पर एक्सपायरी का कॉन्सेप्ट तब शुरू हुआ जब NSE ने अपना डेरिवेटिव सेगमेंट शुरू किया। एक्सचेंज ने 12 जून, 2000 को निफ्टी इंडेक्स फ्यूचर्स में कारोबार शुरू किया, यहीं से एक्सपायरी की शुरुआत हुई। इसके बाद 4 जून, 2001 को इंडेक्स ऑप्शंस, 2 जुलाई, 2001 को स्टॉक ऑप्शंस और 9 नवंबर, 2001 को स्टॉक फ्यूचर्स की शुरुआत हुई।

निवेशकों पर किया असर होगा?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बदलाव से ट्रेडिंग को एक नया आकार मिल सकता है। सभी NSE F&O कॉन्ट्रैक्ट्स अब मंगलवार को समाप्त होंगे। इसका मतलब ये है कि सोमवार और मंगलवार NSE कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए सबसे अस्थिर सेशन हो सकते हैं। ट्रडर्स को अब इस हिसाब से अपनी स्ट्रैटेजी बनानी होगी। निवेशकों को एक्सपायरी की स्ट्रैटेजी बनाने के लिए बुधवार और गुरुवार को BSE कॉन्टैक्ट्स पर नजर रखनी होगी।

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