NSE के ऑप्शंस ट्रेडिंग के लिए नए 'ऑर्डर-टू-ट्रेड' नियम आज से लागू हो गए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य एल्गोरिदम ट्रेडिंग के जरिए होने वाले बेवजह के शोर (noise) को कम करना है। अब ट्रेडर्स को अपनी स्ट्रैटेजी और बेहतर एग्जीक्यूशन पर ज्यादा ध्यान देना होगा। माना जा रहा है कि इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन ट्रेडर्स पर पड़ेगा जो क्विक स्कैल्पिंग स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करते हैं।
अक्सर हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स (HFTs) सिस्टम में एक साथ ढेरों ऑर्डर्स डाल देते हैं। नए नियमों के तहत, ज्यादा ऑर्डर कैंसिल करने वालों पर पेनल्टी लगाई जाएगी। बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि इससे लिक्विडिटी में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए यह एक ज्यादा पारदर्शी और साफ-सुथरा माहौल तैयार करेगा।

NSE के नए ऑर्डर-टू-ट्रेड नियमों का आज बाजार पर क्या होगा असर?
ऑप्शंस स्कैल्पर्स अब अपने ऑटोमेटेड टूल्स में जरूरी बदलाव कर रहे हैं। उन्हें अब बार-बार ऑर्डर मॉडिफाई करने की संख्या घटानी होगी, क्योंकि बार-बार ऑर्डर कैंसिल करने से ट्रेडिंग की लागत बढ़ सकती है। एक्टिव इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए अब सिर्फ रफ्तार ही नहीं, बल्कि ट्रेडिंग में सटीकता (Precision) भी बेहद जरूरी हो गई है।
आज के कारोबार में HPCL और BPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों में काफी हलचल देखी जा सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट इन स्टॉक्स के लिए पॉजिटिव संकेत है। वहीं, नए ऑर्डर्स मिलने से HAL जैसी डिफेंस कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। ट्रेडिंग नियमों में बदलाव के इस दौर में ये सेक्टर्स बाजार को स्थिरता दे सकते हैं।
शुरुआती कारोबार में SBI जैसे सरकारी बैंकों (PSU Banks) में अच्छी मजबूती दिख रही है। हाई वॉल्यूम के कारण स्विंग ट्रेडर्स के बीच ये शेयर पसंदीदा बने हुए हैं। ग्लोबल संकेतों के बावजूद मिडकैप IT शेयरों में भी कमाई के छोटे मौके मिल रहे हैं। हालांकि, आज के बाजार में हर ट्रेड के साथ सख्त स्टॉप लॉस बनाए रखना बहुत जरूरी है।
NSE के नए नियमों के बीच इन स्टॉक्स पर रखें नजर, मिल सकता है मुनाफा
सुबह के उतार-चढ़ाव के बीच ट्रेडर्स को कुछ खास शेयरों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। नीचे दी गई टेबल में कुछ लोकप्रिय शेयरों के अहम लेवल्स दिए गए हैं। ट्रेडिंग के दौरान अपने रिस्क मैनेजमेंट का पूरा ख्याल रखें और सावधानी से पोजीशन बनाएं।
| Stock Name | Sector | Support Level | Target Price |
|---|---|---|---|
| HPCL | OMCs | 470 | 495 |
| BPCL | OMCs | 580 | 610 |
| HAL | Defence | 3200 | 3350 |
| BEL | Defence | 210 | 230 |
| Mazagon Dock | Defence | 2200 | 2320 |
| SBI | PSU Bank | 750 | 785 |
| Bank of Baroda | PSU Bank | 260 | 280 |
| BirlaSoft | Midcap IT | 720 | 760 |
| KPIT Tech | Midcap IT | 1450 | 1520 |
| Coforge | Midcap IT | 5850 | 6050 |
रेगुलेटरी नियमों में यह बदलाव भारतीय डेरिवेटिव मार्केट के लिए एक नए युग की शुरुआत है। यह बिना सोचे-समझे ट्रेडिंग करने के बजाय अनुशासन को बढ़ावा देता है। निवेशकों को अब एक्टिव ऑप्शंस स्ट्राइक्स में लिक्विडिटी के बदलते स्वरूप पर नजर रखनी होगी। आज का बाजार उन्हीं को रिवॉर्ड देगा जो क्वांटिटी के बजाय क्वालिटी ट्रेडिंग को प्राथमिकता देंगे।


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