देश के सबसे व्यस्त लिस्टिंग हफ्ते में हलचल और तेज हो गई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) IPO का अलॉटमेंट मंगलवार, 22 सितंबर को होने की उम्मीद है, जबकि शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग गुरुवार, 24 सितंबर को तय मानी जा रही है। इस बीच, ट्रेडर्स की नजर इससे जुड़े चार बड़े शेयर्स (प्रॉक्सी) — BSE, MCX, CDSL और CAMS पर टिकी हुई है। निवेशक NSE के 'बिड एंड अलॉटमेंट वेरिफिकेशन मॉड्यूल' के जरिए तेजी से अपना स्टेटस चेक कर रहे हैं। वहीं, एंकर निवेशक भी पैसों की आवाजाही पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।
दरअसल, जब भी कोई बड़ा एक्सचेंज बाजार में आता है, तो उससे जुड़ी कंपनियों और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर का वैल्यूएशन भी नए सिरे से तय होता है। फिलहाल दो चीजें काफी अहम हैं—डीमैट खातों की तेजी से बढ़ती संख्या और मार्केट शेयर में फेरबदल। अगस्त के महीने में पिछले कई महीनों की तुलना में सबसे ज्यादा डीमैट खाते खुले, जिसका सीधा फायदा रिटेल सेगमेंट में मजबूत CDSL को मिलता दिख रहा है। उधर, BSE के कैश मार्केट शेयर में उछाल आया है, हालांकि नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद डेरिवेटिव्स टर्नओवर में थोड़ी नरमी जरूर देखी गई।

NSE IPO के इर्द-गिर्द इन प्रॉक्सी शेयर्स पर नजर
कैश मार्केट शेयर में बढ़ोतरी और ऑप्शंस ट्रेडिंग में स्थिरता के चलते BSE पर ट्रेडर्स की खास नजर बनी हुई है। बाजार में इसके डिलीवरी वॉल्यूम, बढ़ते ओपन इंटरेस्ट और नए प्रोडक्ट्स की मंजूरी से जुड़े अपडेट्स को ट्रैक किया जा रहा है। दूसरी ओर, MCX बेहतरीन मार्जिन और मजबूत मुनाफे के साथ दौड़ में बना हुआ है। हालांकि, इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम कमोडिटी मार्केट की हलचल और बिड-आस्क स्प्रेड पर निर्भर करता है, जबकि मेटल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से इसके ट्रेंड को दिशा मिल रही है।
नए IPOs के चलते निवेशकों के जुड़ने और लगातार खुलते नए खातों का फायदा CDSL को मिल रहा है, जिसकी तस्दीक अगस्त के आंकड़े भी करते हैं। वहीं CAMS का बिजनेस मॉडल पेमेंट्स, अल्टरनेटिव्स और KRA ऑपरेशन्स के जरिए काफी डाइवर्सिफाइड है। इससे नया IPO साइकल सुस्त पड़ने पर भी कंपनी को स्थिर कैश फ्लो मिलता रहता है। इस हफ्ते इन दोनों कंपनियों के प्रदर्शन के लिए डीमैट खातों की ग्रोथ और म्यूचुअल फंड में आने वाला निवेश सबसे अहम ट्रिगर होगा।
NSE IPO प्रॉक्सी शेयर्स के लिए ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी
ट्रेडिंग सेटअप की बात करें तो, पिछले हफ्ते के हाई स्तर से ऊपर ब्रेकआउट की स्थिति में 20-दिन के मूविंग एवरेज को ट्रेलिंग स्टॉपलॉस बनाकर चला जा सकता है। 200-दिन के एवरेज की ओर मीन-रिवर्जन (वापसी) की रणनीति तभी अपनाएं जब इंट्राडे वॉलाटिलिटी कम हो रही हो। वहीं, लॉन्ग पोजीशन तभी बनाएं जब ऊंची डिलीवरी के साथ-साथ शेयर की कीमत और ओपन इंटरेस्ट दोनों एक साथ बढ़ रहे हों। किसी भी सिंगल ट्रेड में अपने कैपिटल का रिस्क 1–2% से ज्यादा न रखें। IPO अलॉटमेंट के फाइनल स्टेटस के लिए NSE की वेरिफिकेशन वेबसाइट चेक करते रहें। ध्यान रखें, शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है।


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