नई दिल्ली, अगस्त 25। नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) उन लोगों के लिए शानदार योजना है, जो अपने रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हैं। एनपीएस का एक खास मॉडल है। ये है कॉर्पोरेट मॉडल, जो प्राइवेट सेक्टर के कर्मियों के लिए पेंशन के लिहाज से एक शानदार विकल्प साबित हो रहा है। इस मॉडल की मदद से प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग जॉब करते समय अपनी कमाई का कुछ हिस्सा इस योजना में जमा कर सकते हैं। इससे वे अपने रिटायरमेंट के लिए अच्छा खासा पैसा जमा कर सकते हैं। मगर आपको बता दें कि इन्हीं प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के लिए एनपीएस से जुड़ा एक नियम बदला गया है। यहां हम आपको उसी नियम की जानकारी देंगे। यदि आप भी प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे हैं और एनपीएस में निवेश करते हैं तो नये नियम को जानने के लिए आपको इस खबर को अंत तक पढ़ना चाहिए।
क्या है कॉर्पोरेट एनपीएस मॉडल
सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि कॉर्पोरेट एनपीएस मॉडल क्या है। इस मॉडल के तहत आप जॉब के दौरान कुछ पैसा कांट्रिब्यूट करेंगे। ये पैसा अपने रिटायरमेंट के लिए होगा। कंपनियां भी रिटायरमेंट फंड्स के लिए योगदान करेंगी। इसमें कंपनी और कर्मी दोनों योगदान कर सकते है। इसीलिए ये कॉर्पोरेट एनपीएस मॉडल है।
सालाना न्यूनतम 6 हजार रुपये का योगदान जरूरी
एनपीएस के मौजूदा नियमों के तहत टीयर 1 खाते में एक बार में कम से कम 500 रुपये जमा करने जरूरी हैं। वहीं सालाना न्यूनतम 6 हजार रुपये का योगदान होना जरूरी है। यही वो नियम है जो अपडेट किया गया है। साल भर में आपको एक बार योगदान करना ही होगा। वहीं टीयर 2 खाते में न्यूनतम 250 रुपये का योगदान जरूरी है। वहीं इस खाते में वित्त वर्ष के आखिर में 2000 रुपये का बैलेंस जरूरी कर दिया गया है। कम से कम एक बार कांट्रिब्यूशन इस खाते में भी जरूरी है। अहम बात यह है कि अधिकतम योगदान की कोई लिमिट एनपीएस में तय नहीं की गयी है।
टैक्स बेनफिट भी जानिए
एनपीएस में निवेश करने वालों को टैक्स बेनेफिट भी मिलता है। अगर आप सैलरी पर काम करने वाले व्यक्ति हैं और सीटीसी स्ट्रक्चर ऐसा है, जिसके अनुसार कंपनी आपके एनपीएस खाते में निवेश कर सकती है तो उस स्थिति में आप बेसिक सैलेरी और महंगाई भत्ते के 10 फीसदी तक की कटौती के लिए क्लेम कर सकते हैं। सरकारी सेक्टर में यह सीमा और अधिक है। वहां ये लिमिट 14 फीसदी है। दूसरा फायदा यह है कि आपके कॉन्ट्रिब्यूशन को सेक्शन 80सीसीडी (1) और 80सीसीडी (2), 1(बी) के तहत छूट मिलेगी।
रजिस्टर करने का तरीका
वे कंपनियां जो एनपीएस के लिए रजिस्टर करना चाहती हैं, उन्हें यह काम पॉइंट ऑफ प्रेजेंस के जरिए करना होगा। इससे उनके कर्मियों के रजिस्ट्रेशन में मदद मिलेगी। इस तरह सब्सक्राइबर्स को दोनों खाते (टियर-1 और टियर-2) खोलने में मदद मिलेगी।
कब हुई थी शुरुआत
केंद्र सरकार ने 2011 के आखिरी महीने में एनपीएस को कॉरपोरेट कर्मियों के लिए शुरू किया था। वैसे यह योजना 1 जनवरी 2004 से शुरू हुई थी। मगर तब सैन्य बलों को छोड़ कर अन्य सभी केंद्रीय कर्मियों के लिए ही इस योजना को शुरू किया गया था।
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