नई दिल्ली, जुलाई 17। केंद्र सरकार ने कानूनी माप विज्ञान (पैकज में रखी वस्तुएं सामानों) के नियम 2011 में बदलाव किए हैं। जिसके तहत टीवी, फ्रिज, ओवन और बिजली से चलने वाले सभी उपकरणों से जुड़ी जानकारियां उत्पाद पर एक क्यूआर कोड की मदद से उपलब्ध होंगी। क्यूआर कोड से सारी जानकारी तुरंत पता लगेगी और किसी तरह की गड़बड़ के बारे में तुरंत पता लग जाएगा। फिलहाल इसे एक साल के लिए किया गया। उपभोक्ता को वस्तु के निर्माण से लेकर उपयोग सीमा की समाप्ति तक की सभी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी। वहीं निर्माता के लिए भी बहुत आसानी होगी, वह एक साथ सभी जानकारियां दे सकेंगे।
नए नियमों को लेकर अधिसूचना जारी
क्यूआर कोड में सारी जानकारी देने के पीछे मंत्रालय का मकसद इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों के लिए अनुपालन के बोझ को कम करना है। शनिवार को मंत्रालय ने अधिसूचना को लेकर बयान जारी किया है। उन्होने कहा कि अब क्यूआर कोड की मदद से इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की अनिवार्य घोषणाओं को घोषित करने की अनुमति मिल गई। नए नियमों को लेकर सूचना जारी हो गई है। इसके लिए उपभोक्ता मामलों के विभाग ने लीगल मेट्रोलॉजी) के लिए दूसरा संशोधन किया है। नियम 2022 के तहत एक साल तक के लिए यह छूट दी गई है।
क्यूआर कोड की मदद से पूरी जानकारी
कानूनी माप विज्ञान (पैकज में रखी वस्तुएं सामानों) में बदलावों से उद्योग क्यूआर कोड की मदद से पूरी जानकारी को डिजिटल रुप में दे सकेगा। इसमें जानकारियों को पैकेज में लेबल पर प्रभावी ढंग से घोषित करने की अनुमति होगी। अन्य विवरण क्यूआर कोड के माध्यम से उपभोक्ता को दी जा सकती है।
ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का प्रयोग
कानूनी माप विज्ञान (पैकज में रखी वस्तुएं सामानों) में बदलावों का मकसद क्यूआर कोड की मदद से अनिवार्य घोषणाओं के लिए ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके वस्तु विशेष का निर्माता और उसकी पैकिंग करने वाला या फिर आयातक की संपूर्ण जानकारी जैसे उसका पता, सामान्य नाम, वस्तु की प्रकृति, आकार प्रकार सरीखी जानकारी एक स्कैन की मदद से हासिल कर सकेगा। इसमें केवल फोन नंबर और ई-मेल को इससे अलग रखा गया है।


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