Moonlighting: आयकर अधिकारियों और चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) ने उन कर्मचारियों को चेतया है जो मूनलाइटिंग करते हैं। उनका कहना है कि किसी स्थायी कंपनी से होने वाले आय के अतिरिक्त मूनलाइटिंग करके कमाई करने वालों को मूनलाइटिंग से हुई कमाई को आयकर रिटर्न में घोषित करना चाहिए।

भारत की तमाम बड़ी टेक कंपनियों ने मूनलाइटिंग को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की है। विप्रो और इंफोसिस ने इस तरह की गतिविधी को अनैतिक करार दिया है। दोनो कंपनियों ने कुछ कर्मचारियों को नौकरी से निकाला भी है। (Tax on earning from Moonlighting)
कटता है टीडीएस
टेक कंपनियां अपने कर्मचारियों को जो सैलरी देती हैं उसमें से टीडीएस कटता है। खासकर जब व्यक्ति की आय 30 हजार रुपए से अधिक होती है। लेकिन कुछ मामलों में टीडीएस तब भी लागू होता है जब धारा 194सी के तहत एक ही व्यक्ति को एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया जाता है। कर्मचारी को अपने आयकर रिटर्न में ऐसी आय की घोषणा करनी चाहिए।
कर्मचारी ले रहे हैं सलाह
मूनलाइटिंग करने वाले कई पेशेवर जिसमें मुख्य रूप से टेक कर्मचारियों ने चार्टर्ड एकाउंटेंट और टैक्स की जानकारी रखने वाले लोगों से सलाह लेना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों टीडीएस के बोझ से बचने का तरीका ढूंढ रहे हैं। आमतौर पर HR डिपार्टमेंट दिसंबर या जनवरी तक टैक्स डिक्लेरेशन फॉर्म कर्मचारियों को भेजते हैं। टेक कर्मचारी यह जानना चाह रहे हैं कि क्या अतिरिक्त कमाई को कानूनी रूप से आय के रूप में घोषित किया जा सकता है।

आय छूपाना पड़ सकता है भारी
टीडीएस नहीं कटने और आय की घोषणा नहीं करने वाला कर्मचारी आई-टी कानून का उल्लंधन करता है। विभाग कर्मचारी पर कार्यवाही कर सकता है। कुछ जानकारों का कहना है कि टैक्स अधिकारी आय न घोषित करने को कम रिपोर्टिंग या आय की गलत रिपोर्टिंग के रूप में देखते हैं। इसतरह से कर्मचारियों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का का कहना है कि अगर भविष्य विभाग अघोषित आय का पता लगाती है, तो आयकर विभाग आईटी अधिनियम की धारा 148 ए के तहत जांच करेगा और कर्मचारी पर जुर्माना लगाया जाएगा।


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