नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर मोदी सरकार ने कारोबारियों को भारी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने जीएसटी में छूट का दायरा बढ़ाकर दुगना कर दिया है। अभी तक 20 लाख रुपये का कारोबार करने वाले लोगों को जीएसटी में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं था। मोदी सरकार ने इस सीमा को बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दिया है। इसके अलावा जिन कारोबारियों का वार्षिक कारोबार 1.5 करोड़ रुपये तक है, वे कंपोजिशन स्कीम का फायदा लेने का विकल्प चुन सकते हैं। ऐसे में उन्हें 1 फीसदी की दर से जीएसटी टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। पहले यह सुविधा 75 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले कारोबारी को मिल रही थी।

वित्त मंत्रालय ने दी जानकारी
वित्त मंत्रालय ने आज कई ट्वीट के माध्यम से इस बारे में जानकारी दी है। इस जानकारी के मुताबिक जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स देने वालों का आधार बढ़कर करीब दोगुना हो गया है। जीएसटी लागू होते वक्त इसके दायरे में आने वाले कारोबारियों की संख्याा जहां करीब 65 लाख थी, जो बढ़कर अब 1.24 करोड़ हो गई है। वित्त मंत्रालय अपने कई ट्वीट में बताया है कि जीएसटी लागू किए जाने के बाद से बहुत सी वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स रेट में कमी की गई है। मंत्रालय ने कहा है कि अब 28 फीसदी टैक्स स्लैब के अंतर्गत केवल विलासिता से जुड़ी चीजें एवं अहितकर वस्तुएं ही बची हैं। शुरुआत में इस टैक्स स्लैब में 230 वस्तुएं थी, लेकिन अब इनमें से करीब 200 वस्तुओं को कम टैक्स वाले स्लैब में कर दिया गया है।
आवासीय सेक्टर को बड़ी राहत
वित्त मंत्रालय अपने इन ट्वीट बताया है कि निर्माण क्षेत्र एवं आवासीय सेक्टर को भारी राहत प्रदान की गई है। इन सेक्टर को अब 5 फीसदी के टैक्स स्लैब के अंतर्गत रखा गया है। सस्ते मकानों पर जीएसटी की दर को घटाकर 1 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा जीएसटी से जुड़ी सारी प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमैटेड कर दिया गया है। अब तक 50 करोड़ जीएसटी रिटर्न ऑनलाइन फाइल किए जा चुके हैं और 131 करोड़ ई-बिल जेनरेट हुए हैं।
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