नयी दिल्ली। दुनिया में कुछ साधारण सी दिखने वाली चीजें इतनी महंगी होती हैं उनकी कीमत पर यकीन करना मुश्किल होता है। इसकी वजह होती है इन चीजों का दुर्लभ होना। दुर्लभ और मुश्किल से मिलने के कारण बहुत साधारण सी चीज भी बेशकीमती हो जाती है। ऐसी ही एक खास लकड़ी है, जिसकी कीमत प्रति किलो लाखों में है। भारत में तो चंदन को ही तरजीह दी जाती है। मगर चंदन की कीमत 5-6 हजार रु प्रति किलो से ज्यादा नहीं है। मगर आज हम जिस लकड़ी के बारे में आपको बताएंगे वो भारत बल्कि दुनिया की सबसे महंगी लकड़ी है।
अफ्रीकी ब्लैकवुड
जिस लकड़ी की बात हम कर रहे हैं उसका नाम है अफ्रीकी ब्लैकवुड। ये दुनिया की सबसे महंगी लकड़ी होने के साथ-साथ पृथ्वी की सबसे महंगी चीजों में शामिल है। अफ्रीकी ब्लैकवुड एक छोटा पेड़ होता है, जो करीब 4 से 15 मीटर तक लंबा हो सकता है। इसकी छाल भूरे रंग की होती है। जैसा की नाम से ही जाहिर ये पेड़ अफ्रीका में पाया जाता है। अफ्रीकी ब्लैकवुड के पेड़ सेनेगल पूर्व से इरिट्रिया तक अफ्रीका के सूखे क्षेत्रों और दक्षिण अफ्रीका के उत्तर-पूर्वी भागों में मिलते हैं।
कितनी होती है कीमत
अफ्रीकी ब्लैकवुड की कीमत 8 हजार पाउंड प्रति किलो होती है। भारतीय मुद्रा ये 7 लाख रुपये से भी ज्यादा है। इस एक किलो लकड़ी से आप एक बढ़िया कार या ढेर सारा सोना खरीद सकते हैं। जैसा कि पहले जिक्र किया जा चुका है दुर्लभ होने के कारण कुछ चीजों की कीमत बहुत अधिक हो जाती है। इसी तरह अफ्रीकी ब्लैकवुड की कीमत भी इसके दुर्लभ होने के कारण ही इतनी ज्यादा है।
क्यों हुआ दुर्लभ
बता दें कि अफ्रीकी ब्लैकवुड को ठीक से तैयार होने में 60 सालों का समय लगता है। मगर इस तरह की महंगी चीजों की अवैध तस्करी एक बड़ा मामला है। तस्कर लालच में इसे समय से पहले ही काट देते हैं, जिससे ये पेड़ बहुत अधिक दुर्लभ हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार केन्या, तंजानिया आदि देशों में अफ्रीकी ब्लैकवुड लकड़ी की काफी तस्करी होती है।
किन चीजों में होता इस्तेमाल
गौरतलब कि अफ्रीकी ब्लैकवुड से मिली लकड़ी का इस्तेमाल कुछ खास चीजों के लिए किया जाता है। वैसे तो इस लकड़ी से फर्नीचर भी तैयार होता है। मगर अफ्रीका में इससे शहनाई और बांसुरी सहित गिटार भी तैयार किये जाते हैं। जो घरेलू फर्नीचर इस लकड़ी से तैयार होता है उसकी कीमत भी बहुत अधिक होती है। आम व्यक्ति उस फर्नीचर को नहीं खरीद सकता।
इन नामों से भी जाना जाता है
इसके पेड़ को babanus और grenadilla दूसरे नामों से भी जाना जाता है। बता दें कि अब अफ्रीकी ब्लैकवुड के संरक्षण के लिए कई संगठन भी आगे आए हैं। अधिक उपयोग के कारण केन्या में इसगो पेड़ को गंभीर रूप से खतरा है। बताया जाता है कि तंजानिया और मोजाम्बिक में भी ध्यान देने की आवश्यकता है। केन्या में लकड़ी की अवैध तस्करी की वजह से पेड़ों की कटाई बहुत अधिक की जा रही है।
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