देश ने कुछ हफ्ते पहले ही अपना सबसे बड़ा रतन खो दिया है. रतन टाट की मृत्यु के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को कमाल सौंपने को दिया गया है. नोएल टाटा को अब टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बना दिया गया है. जिसका मतलब हुआ कि पूरा टाटा समूह अब उनके कंट्रोल में है. लेकिन अब बड़ी खबर ये आ रही है कि नोएल टाटा कभी भी टाटा संस के चेयरमैन नहीं बन सकते हैं.

रतन टाटा की मृत्यु के बाद सभी देशवासियों को बड़ा झटका लगा था. इसके साथ ही सब यहीं सोच में थे कि अब इतने बड़े विशाल टाटा समूह को कौन संभालने वाला है. जिसके बाद रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा का नाम सामने आ रहा था.
नोएल टाटा को प्रमुख टाटा ग्रुप का चेयरमैन बना दिया गया है. लेकिन वे कभी भी टाटा संस का चेयरमैन नहीं बन सकते हैं.
Noel Tata क्यों नहीं बन पाएंगे टाटा संस का चेयरमैन?
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि नोएल टाटा की टाटा संस को लेकर उम्मीद टूटी है. साल 2011 में ये चर्चा काफी चल रही थी कि रतन टाटा का टाटा संस का चेयरमैनशिप छोड़ने के बाद नोएल टाटा को चेयरमैन बनाया जाएगा. लेकिन उस समय उनके साले साइरस मिस्त्री को चेयरमैन बनाया गया था.
जिसके बाद साल 2019 में भी ये चर्चा चली की उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया जाएगा, लेकिन कुछ बात नहीं बन पाई. जिसके बाद 2022 में जब वे दोरबजी टाटा ट्रस्ट का ट्रस्टी बने तब लगा की उन्हें अब टाटा संस का चेयरमैन बना दिया जाएगा. तभी भी कुछ बात नहीं बनी.
ये सब टाटा समूह के एक कानून की वजह से हो रहा है. इसलिए जब रातन टाटा मौजूद थे ना ही वे तब टाटा संस के चेयरमैन बन पाएं. अभी भी इस कानून के चलते वे टाटा संस के चेयरमैन नहीं बन पाएं है.
क्या है ये कानून?
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में बदलाव कर दिया गया था. इस बदलाव के तहत किसी सेम व्यक्ति को एक साथ टाटा ट्रस्ट और टाटा संस का चेयरमैन नहीं बनाया जाएगा. इसलिए नोएल टाटा अभी भी टाटा संस के चेयरमैन नहीं बन सकते हैं.
क्योंकि नोएल टाटा अभी टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन है. वहीं ये भी पता चला है कि रतन टाटा, टाटा परिवार के वो आखिरी सदस्य थे, जो टाटा ट्रस्ट और टाटा संस दोनों के एकसाथ चेयरमैन रहे चुके हैं.
टाटा संस क्यों है जरूरी?
टाटा संस के तहत व्यक्ति टाटा समूह की सभी कंपनियों की होल्डिंग संस्था है. जिसका सीधे-सीधे अर्थ हुआ की टाटा की सभी कंपनियों में टाटा संस की बड़ी हिस्सेदारी मौजूद है. इसके साथ ही टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 66 फीसदी तक हिस्सेदारी मौजूद है.
इसलिए एक तरह से कह सकते है कि टाटा ट्रस्ट का चेयमैन पूरी टाटा समूह पर बड़ा नियंत्रण कर सकता है.


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