Nobel Prize 2025: सोमवार को 2025 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा मेडिसिन में पुरस्कार दिए जाने के ऐलान के साथ शुरू हुई। 2025 का नोबेल पुरस्कार फिजियोलॉजी या मेडिसिन (चिकित्सा) में अमेरिका की मैरी ई. ब्रंकॉ, अमेरिका के फ्रेड राम्सडेल और जापान के शिमोन सकागुची को दिया गया है। स्टॉकहोम के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने सोमवार को नोबेल पुरस्कार की घोषणा की।

फिजियोलॉजी या मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार के रूप में जाना जाने वाला यह सम्मान 1901 से 2024 के बीच 229 नोबेल पुरस्कार विजेताओं को 115 बार दिया जा चुका है।
इन तीनों को क्यों दिया गया यह सम्मान
यह पुरस्कार उनकी 'पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस' (शरीर के बाहरी हिस्सों में इम्यून सिस्टम की सहनशीलता) से जुड़ी खोजों के लिए दिया गया है। यह खोज शरीर की रक्षा प्रणाली को समझने में क्रांति लाई है, जो ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस, टाइप-1 डायबिटीज और ल्यूपस के इलाज का रास्ता खोलेगी।
क्या होती है पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस?
पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस एक ऐसा सिस्टम है जो शरीर के इम्यून सिस्टम को अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करने से रोकता है। स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट द्वारा घोषित इस पुरस्कार से दशकों के रिसर्च को मान्यता मिली है जिसने स्वप्रतिरक्षी रोगों की समझ को गहरा किया है और इम्यून साइंस और कैंसर मेडिसिन में नए उपचारों का रास्ता खोला है।
हमारा शरीर इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) से हमेशा खतरे से लड़ता है - जैसे वायरस या बैक्टीरिया से, लेकिन कभी-कभी यह सिस्टम गलती से अपने ही अंगों पर हमला कर देता है, जिसे ऑटोइम्यून बीमारी कहते हैं। पुराने वैज्ञानिकों को लगता था कि इम्यून सेल्स (रोगाणु से लड़ने वाली कोशिकाएं) शरीर के अंदर ही 'सहिष्णु' (टॉलरेंट) बन जाती हैं, जिसे सेंट्रल इम्यून टॉलरेंस कहते हैं।
लेकिन विजेताओं ने दिखाया कि शरीर के बाहरी हिस्सों (पेरिफेरल) में भी एक खास तंत्र काम करता है, जो इम्यून सिस्टम को नियंत्रित रखता है। इससे शरीर के अंग सुरक्षित रहते हैं।
यह खोज 1990 के दशक से शुरू हुई। विजेताओं ने पाया कि 'रेगुलेटरी टी सेल्स' (Tregs) नामक कोशिकाएं इम्यून सिस्टम को ब्रेक लगाती हैं। अगर ये कोशिकाएं कमजोर हों, तो शरीर के अंगों पर हमला होता है। यह खोज कैंसर, ट्रांसप्लांट और एलर्जी के इलाज में भी मदद करेगी।
तीनों ने मिलकर किस तरह से किया काम
शिमोन सकागुची (जापान) शिमोन सकागुची को रेगुलेटरी टी सेल्स की खोज के लिए जाना जाता है।1995 में उन्होंने दिखाया कि CD4+ CD25+ कोशिकाएं इम्यून सिस्टम को दबाती हैं। यह कोशिकाएं शरीर को अपने ही ऊतकों से लड़ने से रोकती हैं। सकागुची की खोज से पता चला कि Tregs इम्यून टॉलरेंस बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। उनके काम ने ऑटोइम्यून रोगों की समझ बदल दी। आज Tregs को इंजीनियर करके दवाएं बन रही हैं।
वहीं, मैरी ब्रंकॉ और फ्रेड राम्सडेल ने फॉक्सपी3 (FOXP3) जीन की खोज की, जो Tregs कोशिकाओं का 'मास्टर स्विच' है। 2001 में उन्होंने पाया कि FOXP3 में म्यूटेशन से IPEX सिंड्रोम होता है - एक दुर्लभ बीमारी जहां बच्चे का इम्यून सिस्टम अपने ही शरीर पर हमला करता है। इससे बाल रोग, डायबिटीज और आंतों की समस्या होती है। उनके काम ने साबित किया कि FOXP3 Tregs कोशिकाओं को सक्रिय रखता है। यह खोज पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस को समझने में मील का पत्थर साबित हुई। तीनों ने मिलकर दिखाया कि सेंट्रल टॉलरेंस के अलावा पेरिफेरल टॉलरेंस भी जरूरी है। उनकी खोजें अब दवाओं में इस्तेमाल हो रही हैं, जैसे ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए Tregs थेरेपी।
जानें कब किस फील्ड का मिलेगा नोबेल पुरस्कार
नोबेल पुरस्कार दिए जाने की इस कड़ी में अब मंगलवार को फिजिक्स, बुधवार को केमेस्ट्री और गुरुवार को लिटरेचर में नोबेल पुरस्कार का ऐलान होगा। वहीं शांति के नोबेल पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को और इकोनॉमी के नोबेल मेमोरियल पुरस्कार की घोषणा 13 अक्टूबर को की जाएगी।
पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा, जो इन पुरस्कारों की स्थापना करने वाले अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि है। नोबेल एक धनी स्वीडिश उद्योगपति और डायनामाइट के आविष्कारक थे। उनका निधन 1896 में हुआ था।
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