आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को कहा कि सरकार किसी भी गोल्ड एमनेस्टी योजना पर विचार नहीं कर रही है, यह विधि पीली धातु के रूप में जमा की गई बेहिसाब संपत्ति का पता लगाने के प्रयासों का हिस्सा है।
आपको बता दें कि मीडिया में यह खबर आ रही थी कि सरकार गोल्ड एमनेस्टी स्कीम शुरु करने जा रही है जिसके तहत बिना रसीद वाले सोने की वैल्यू सरकार चेक करेगी। इस स्कीम के तहत एक तय मात्रा से अधिक घर में रखे बिना रसीद वाले सोने की जानकारी सरकार को देनी होगी। इसकी कीमत तय करने के बाद इस पर आपको टैक्स देना होगा। माना जा रहा है कि काला धन पर लगाम लगाने के लिए यह नोटबंदी के बाद दूसरा बड़ा कदम होगा।

रिर्पोट के अनुसार आयकर विभाग के पास ऐसी कोई गोल्ड एमनेस्टी योजना नहीं है, जिसे मीडिया में रिपोर्ट किया जा रहा है।
आपको बता दें कि मीडिया की खबरों के अनुसार वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक गोल्ड एमनेस्टी स्कीम का मसौदा तैयार कर लिया गया था। इसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिलने की खबर थी। ऐसा कहा गया था भारत में काले धन को सोने के रूप में घर में जमा करके रखा जाता है। ऐसे में काले धन से सोने खरीदने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मोदी सरकार इनकम टैक्स की एमनेस्टी स्कीम की तरह सोने के लिए एमनेस्टी स्कीम ला रही है।
साथ ही स्कीम में सरकार को घर में रखे सोने की कीमत की जानकारी देने का दावा किया गया था। साथ ही अधिक मात्रा में सोने रखने पर टैक्स देने की बात कही गयी थी। वहीं घर के अलावा मंदिर और ट्रस्ट के पास पड़े गोल्ड का निवेश के तौर पर इस्तेमाल करने का भी दावा किया गया था।
रिपोर्ट्स ने संकेत दिया कि योजना पूर्ववर्ती एमनेस्टी योजना प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) की सीमित सफलता को पार करने की कोशिश करेगी, जिसे 2017 में शुरू किए गए आईडीएस-द्वितीय के रूप में भी जाना जाता है, जो कि पोस्ट-डिमनेटेशन एक्सरसाइज है।


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