Budget 2025: बजट भाषण को लेकर इन FM के नाम हैं कई रिकॉर्ड; मोरारजी देसाई, निर्मला सीतारमण समेत ये नाम शामिल

Budget 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2025 को यूनियन बजट 2025 पेश करने वाली हैं। इस बजट को पेश होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पेश बजट होने जा रहा है वहीं निर्मला सीतारमण का ये 8वां बजट होगा।

इस बजट से देश के कारोबारियों समेत आम नागरिकों को बड़ी उम्मीदें हैं। सबकी नजर निर्मला सीतारमण के इस बजट पर रहने वाली है किस सेक्टर में खास फायदा मिलने वाला है। चलिए आपको हम बजट से जुड़े कुछ पिछले रिकॉर्ड के बारे में बताते हैं।

Budget 2025 Longest Budget Speech

इनका तोड़ा था वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रिकॉर्ड

इस बार मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा बजट वहीं निर्मला सीतारमण अपना 8वां बजट पेश करने वाली हैं। आपको बता दें भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम भी सबसे ज्यादा केंद्रीय बजट पेश करने का इतिहास है। इन्होंने भारत में अलग-अलग समय के अंदर अपने 10 बजट पेश किए हैं। हालांकि, इस फेहरिस्त में अब निर्मला सीतारमण का नाम जुड़ चुका है, वित्त मंत्री इस रिकॉर्ड को तोड़ने में अब ज्यादा दूर नहीं हैं। वहीं भारत की पहली पूर्णकालिक महिला भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हैं।

ये था सबसे लंबा बजट

भारत में सबसे लंबा बजट भाषण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया है। ये बजट साल 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया था, जिसका समय पूरा 2 घंटे 40 मिनट का था।

ये था सबसे छोटा बजट भाषण

साल 1977 में हीरूभाई मूलजीभाई पटेल ने भारत का सबसे छोटा बजट भाषण पेश किया था, ये बजट भाषण सिर्फ 800 शब्दों का था। इस वजह से इस बजट को भारत के इतिहास में सबसे छोटे बजट के रुप में देखा जाता है।

स्वतंत्रता के बाद का बजट

भारत का पहला स्वतंत्रता-पश्चात बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। भारत के पहले वित्त मंत्री आर.के. शानमुखम चेट्टी ने यह बजट पेश किया था। इसमें देश की आर्थिक चुनौतियों से निपटने और इसकी वित्तीय सेहत सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

निर्मला सीतारमण फरवरी 2025 में अपना आठवां बजट पेश करने वाली हैं। 2019 में अपनी पहली प्रस्तुति के बाद से उन्होंने सात बजट पेश किए हैं। वहीं उनके पास सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड है, जो 2020 में 2 घंटे और 42 मिनट तक चला था।

ऐतिहासिक मायने

भारत में बजट पेश करने की परंपरा 1860 में अपनी शुरुआत के बाद से काफी विकसित हुई है। शुरू में औपनिवेशिक जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया यह बजट स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय विकास के लिए एक साधन बन गया है। प्रत्येक वित्त मंत्री समकालीन आर्थिक मुद्दों को संबोधित करने के लिए अपना अनूठा नजरिया लेकर आता है।

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