सितंबर में भारतीय शेयर बाज़ार पर बिकवाली का दबाव काफी बढ़ गया है। निफ्टी सितंबर सीरीज में 1,600 अंकों से ज्यादा टूट चुका है और मंगलवार के कारोबार के बाद इंडेक्स 22,716 के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। यह गिरावट बाजार के लिए चिंता बढ़ाने वाली है, खासकर तब जब इंडेक्स लंबे समय के अहम तकनीकी सपोर्ट के करीब पहुंच गया है।

मंगलवार के कारोबार में निफ्टी ने शुरुआत में तेज गिरावट दर्ज की और दिन के दौरान करीब 22,569 का निचला स्तर छुआ। हालांकि बाद में निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली और इंडेक्स 22,716.20 पर बंद हुआ। सितंबर में अब तक निफ्टी करीब 6.5-6.7 फीसदी कमजोर हो चुका है।
कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बड़ी चिंता-
बाजार में इस कमजोरी के पीछे कई कारण काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जिससे भारत के लिए आयात बिल और महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, रुपये में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया है।
22,600 का स्तर बाजार के लिए अहम-
अब सबसे अहम सवाल निफ्टी के अगले सपोर्ट को लेकर है। इंडेक्स करीब 22,600 के 200-वीक मूविंग एवरेज तक पहुंच चुका है। यह एक महत्वपूर्ण लॉन्ग-टर्म तकनीकी स्तर माना जाता है और रिपोर्टों के मुताबिक कोविड-19 बाजार गिरावट के बाद पहली बार निफ्टी इस स्तर के आसपास आया है। ऐसे में 22,600 का स्तर बाजार के लिए बेहद अहम बन गया है।
विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है-
तकनीकी विशेषज्ञों की राय भी इस स्तर पर बंटी हुई है। एलकेपी सिक्योरिटीज के रुपक डे के मुताबिक 22,600 के ऊपर टिके रहने पर रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है, जबकि इसके नीचे निर्णायक ब्रेक बाजार में तेज गिरावट का रास्ता खोल सकता है। HDFC सिक्योरिटीज के नागराज शेट्टी ने 22,550 के नीचे कमजोरी बढ़ने की संभावना जताई है और 22,200 की ओर गिरावट का स्तर बताया है। वहीं एसबीआई सिक्योरिटीज के अनुसार 22,570-22,550 तत्काल सपोर्ट जोन है, जबकि 22,900-22,930 अहम रेजिस्टेंस रहेगा।
इसलिए आने वाले कारोबारी सत्रों में 22,600 के आसपास निफ्टी का व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। अगर यह स्तर संभलता है तो बाजार में राहत की रिकवरी देखने को मिल सकती है, लेकिन इसके नीचे लगातार कमजोरी रहने पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर क्रूड, विदेशी फंड फ्लो, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर बनी रहेगी।
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