New Rules From November 1 2025: अक्टूबर महीने के खत्म होने में सिर्फ अब दो दिन बचे हैं और नए महीने की शुरुआत यानी 1 नवंबर 2025 से कई सारे नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इन बदलाव का असर आम आदमी के जेब पर पड़ सकता है। इन बदलाव में आधार कार्ड, क्रेडिट कार्ड से लेकर एलपीजी तक के नियम शामिल हैं। चलिए जानते हैं, 1 नवंबर से कौन से बदलाव होने जा रहे हैं।

यह हुआआधार अपडेट में बदलाव
देशभर के आधार धारकों के लिए बड़ी खबर आई है। UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने 1 नवंबर 2025 से आधार कार्ड अपडेट से जुड़ी सुविधाओं में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। इस बदलाव के बाद लोगों को अब अपने आधार कार्ड में किसी भी तरह का संशोधन करने के लिए केंद्र के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
UIDAI की नई व्यवस्था के तहत, अब आप अपने नाम, जन्मतिथि, पता और मोबाइल नंबर जैसी अहम जानकारियां ऑनलाइन घर बैठे ही सुधार सकेंगे। पहले इन बदलावों के लिए नामांकन केंद्र जाना अनिवार्य था, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो गई है।
आपको बस UIDAI की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लॉगइन कर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। सिस्टम अपने आप आपकी जानकारी को सरकारी डेटाबेस से मिलान कर वेरिफाई करेगा। यह डेटाबेस PAN, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड और जन्म प्रमाणपत्र जैसे आधिकारिक दस्तावेजों से जुड़ा रहेगा, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना बेहद कम हो जाएगी।
बैंकिंग नियमों में बदलाव
नए महीने की शुरुआत के साथ ही बैंकिंग प्रणाली में भी बदलाव होने जा रहा है। ग्राहक पहले अपने अकाउंट, लॉकर और सेफ कस्टडी के लिए पहले एक नॉमिनी के बना पाते थे लेकिन अब नए बदलाव के कारण चार नॉमिनी बना पाएंगे। वहीं, ग्राहक को यह भी अधिकार होगा कि किस नॉमिनी को कितना हिस्सा मिलेगा।
एसबीआई क्रेडिट कार्ड के चार्जेस में बदलाव
SBI Card ने बताया है कि अगर आप अपने बच्चों की स्कूल या कॉलेज की फीस किसी थर्ड पार्टी ऐप या वेबसाइट के जरिए कार्ड से भरते हैं, तो अब इस पर 1% अतिरिक्त चार्ज लगेगा। लेकिन अगर आप सीधे स्कूल या कॉलेज की वेबसाइट या उनके POS मशीन के जरिए पेमेंट करते हैं, तो कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इसका मतलब है कि अब यह ध्यान रखना जरूरी हो गया है कि आप फीस किस माध्यम से भर रहे हैं।
म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े नए नियम
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड निवेश में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। नए नियमों के तहत अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के अधिकारी, कर्मचारी या उनके परिवार के सदस्य अगर 15 लाख रुपए से ज्यादा का निवेश या रिडेम्पशन करते हैं, तो इसकी जानकारी तुरंत कंपनी के कंप्लायंस ऑफिसर को देनी होगी।
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