नई दिल्ली, जुलाई 28। पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक जैसे तनावग्रस्त बैंकों में जमाकर्ताओं को राहत देने के लिए, यूनियन कैबिनेट ने बुधवार को जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम अधिनियम, 1961 (डीआईसीजीसी अधिनियम) में संशोधन को मंजूरी दे दी। इस संशोधन का उद्देश्य पीएमसी बैंक, यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक जैसे बैंकों के जमाकर्ताओं के सामने आने वाली दिक्कतों को कम करना है। इस संशोधन से जमाकर्ताओं को तनावग्रस्त बैंक में फंसे अपने पैसे को प्राप्त करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा उस बैंक का निपटारा करने तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक और अहम बात कि केंद्र सरकार ने जमा बीमा कवर को बढ़ाकर 5 लाख रु कर दिया है। फिर भले ही बैंक को आरबीआई की निगरानी में रखा गया हो और उसके रेगुलर ऑपरेशन को निलंबित कर दिया गया हो।
90 दिन में मिलेंगे पैसे
एक और अच्छी बात यह है कि बैंक डूबने पर आपको 90 दिन के भीतर जमा पैसा मिलेगा। बता दें कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) आरबीआई की सब्सिडरी कंपनी है। जब कोई बैंक अपने जमाकर्ताओं को भुगतान करने में विफल रहता है तो ये एजेंसी बैंक जमाधारकों के लिए बीमा कवर प्रदान करती है।
डीआईसीडीसी देता है गारंटी
डीआईसीडीसी भारत में स्थित सभी कमर्शियल और विदेशी बैंकों में जमाकर्ताओं के पैसे की सुरक्षा करता है। इनमें केंद्रीय, राज्य और शहरी सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और स्थानीय बैंक शामिल हैं। हालांकि इसमें शर्त ये होती है कि बैंक ने डीआईसीजीसी कवर का विकल्प चुना हो।
बजट में हुआ था ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान कहा था मैं इस सत्र में ही डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 में संशोधन पेश करूंगी ताकि प्रावधानों को सुव्यवस्थित किया जा सके। ऐसे में यदि कोई बैंक अस्थायी रूप से अपने दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हो, तो ऐसे बैंक के जमाकर्ताओं को उनका पैसा आसानी से इंश्योरेंस कवर तक और समय पर मिल सके।


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