New Rule: फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग से जुड़े ट्रेडर्स के लिए बड़ी खबर है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने F&O के लिए लॉट साइज में बदलाव किया है. यह एडजस्टमेंट भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (SEBI) की ओर से जारी नए दिशा-निर्देश पेश किए जाने के बाद हुआ है. नए बदलावों के मुताबिक निफ्टी-50 के लिए लॉट साइज 25 से बढ़कर 75 किया गया है. इसी तरह बैंक निफ्टी के लिए लॉट साइज को 15 से बढ़कर 30 किया गया है. नए बदलाव 11 नवंबर 2024 से लागू हो जाएगे.
इन नियमों में भी होगा बदलाव
सेबी ने हाल ही में इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट में पोजिशन लिमिट को बढ़ाया है. इसको बढ़ाकर 7500 करोड़ रुपए या ओपन इंटरेस्ट का 15% किया गया है. यह बदलाव सामूहिक रूप से ब्रोकर और क्लाइंट दोनों पर लागू होता है. इस बदलाव में यह शामिल है कि यदि ओपन इंटरेस्ट कम हो जाता है, तो पोजिशन लिमिट को पार करने पर जुर्माना नहीं लगेगा.
नए निपटान और भुगतान नियम
सेबी ने शेयरों के निपटान और भुगतान से संबंधित नियमों में भी संशोधन किया है, जिसका उद्देश्य प्रक्रिया को सरल और तेज करना है. शुरू में 14 अक्टूबर को लागू होने वाले इन नए नियमों की शुरूआत को 11 नवंबर 2024 तक के लिए टाल दिया गया है. सबसे बड़े बदलावों में से एक है ग्राहक के खाते में शेयर जमा करने की समयसीमा में बदलाव. अब अगले दिन दोपहर 1:30 बजे के बजाय, शेयर निपटान के उसी दिन दोपहर 3:30 बजे तक जमा किए जाएंगे.

निवेशकों के खातों में डायरेक्ट ट्रांसफर
पहले,शेयरों का निपटान क्लियरिंग कॉरपोरेशन के माध्यम से किया जाता था, फिर उन्हें ब्रोकर के खाते में और फिर निवेशक के खाते में ट्रांसफर किया जाता था. हालांकि, नए नियमों के तहत इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा. अब, शेयर सीधे क्लियरिंग कॉरपोरेशन से निवेशक के डीमैट खाते में ट्रांसफर होंगे. दरअसल, इस नई प्रक्रिया का उद्देश्य शेयरों के ट्रांसफर को बेहतर करना है.
इन नियमों को संशोधित करने का सेबी का निर्णय स्टॉक एक्सचेंजों, डिपॉजिटरी और ब्रोकरों सहित बाजार के हितधारकों को अपने तकनीकी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से नई प्रणाली के साथ एकीकृत करने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करने की मंशा से उपजा है.


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