New Netbanking system: भारत में डिजिटल पेमेंट का इकोसिस्टम लगातार विकसित हो रहा है। UPI की सफलता के बाद, अब नेटबैंकिंग अनुभव को भी बेहतर बनाने की योजना है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा 7 से 9 अक्टूबर को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 में इस नए नेटबैंकिंग स्विच को लॉन्च कर सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म ऑनलाइन व्यापारियों के लिए नेटबैंकिंग पेमेंट को स्टैंडराइज्ड और आसान बनाने पर केंद्रित है।

नेटबैंकिंग 2.0 कैसे काम करेगा?
फिलहाल रेजरपे, कैशफ्री पेमेंट्स और बिलडेस्क जैसे पेमेंट एग्रीगेटर्स को हर बैंक के साथ अलग-अलग साझेदारी करनी पड़ती है। अगर किसी पेमेंट एग्रीगेटर का ग्राहक के बैंक के साथ एलायंस नहीं है, तो वह नेटबैंकिंग के माध्यम से पेमेंट नहीं कर पाता है। इससे ग्राहक को परेशानी होती है। लेकिन, 'नेटबैंकिंग 2.0' एक नए स्विच के रूप में काम करेगा, जो मौजूदा पेमेंट सिस्टम पर निर्भर नहीं होगा।
यह कई बैंकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर नेटबैंकिंग लेनदेन की इंटरऑपरेबिलिटी को सक्षम करेगा। इससे ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए बैंकों के साथ एकीकरण आसान हो जाएगा। एक पेमेंट एग्रीगेटर फर्म के अधिकारी ने कहा कि नेटबैंकिंग को भुगतान विधि के रूप में सक्षम बनाने के लिए हमें कई बैंकों के कोर बैंकिंग सिस्टम से जुड़ना पड़ता है। अब हमारे पास बैकअप के तौर पर एनबीबीएल द्वारा विकसित किए जा रहे नए नेटबैंकिंग समाधान से जुड़ने का विकल्प भी होगा।
ग्राहकों और व्यापारियों को नए सिस्टम से लाभ
इस नई सिस्टम से व्यापारियों को भुगतान मिलने में होने वाली देरी कम होगी। अप्रैल 2024 में बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सिस्टम में मानकीकरण की कमी, चार्जबैक और निपटान में कठिनाइयों जैसी समस्याएं हैं। उम्मीद है कि यह नया बदलाव इन सभी समस्याओं को दूर कर देगा।
इस प्रोजेक्ट में कौन शामिल हैं?
बिजनेस स्टैंडर्ड के रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का संचालन NPCI की सहायक कंपनी एनबीबीएल द्वारा किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक सहित कई ऑनलाइन भुगतान एग्रीगेटर्स अगले महीने इस नई सिस्टम के साथ लाइव होने की उम्मीद है।


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