नयी दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज लॉकडाउन में ताबड़तोड़ डील करने वाली कंपनी बनती जा रही है। एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज अब ऑनलाइन फ़ार्मेसी कंपनी नेटमेड्स में अधिकांश हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। दोनों पक्षों के बीच सौदे को लेकर बात एडवांस लेवल पर पहुंच गई है। रिलायंस का इस डील के पीछे उद्देश्य ई-कॉमर्स सेक्टर में अपनी पहुंच बढ़ाना है। रिलायंस नेटमेड्स में हिस्सेदारी खरीदने के लिए अपनी किसी सब्सिडरी कंपनी के जरिए करीब 13-15 करोड़ डॉलर का निवेश कर सकती है। रिलायंस की तरफ से किए जाने वाले निवेश से नेटमेड्स अपना कारोबार भी बढ़ाएगी। ये सौदा नेटमेड्स के अंतिम फंडिंग राउंड के भाव से थोड़े अधिक प्रीमियम पर हो रहा है।
नेटमेड्स ने अब तक जुटाये 10 करोड़ डॉलर
2015 में अपनी शुरुआत के बाद से नेटमेड्स ने अब तक तीन राउंड की फंडिंग में 10 करोड़ डॉलर जुटाए हैं। कंपनी की शुरुआत प्रदीप दाधा ने की थी, जिनका परिवार सन फार्मास्युटिकल्स के लिए पहले डिस्ट्रीब्यूटर्स में से एक था। वितरण कारोबार को बाद में सन फार्मा ने खरीद लिया था। दाधा के पारिवारिक ऑफिस के अलावा नेटमेड्स में हेल्थकेयर निवेशक OrbiMed, निवेश बैंक MAPE Advisory, istema Asia Fund और सिंगापुर स्थित Daun Penh Cambodia Group ने निवेश किया हुआ है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस और नेटमेड्स के बीच बातचीत लॉकडाउन से पहले ही चल रही है।
रिलायंस का फार्मा सेक्टर में दूसरा बड़ा दांव
फार्मा सेक्टर में रिलायंस का यह दूसरा बड़ा कदम होगा। इससे पहले पिछले साल रिलायंस ने बेंगलुरु स्थित सी-स्क्वायर इंफो सॉल्यूशंस में 82 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी, जो फार्मा सेक्टर में वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और सेल्स फोर्स के लिए सॉफ्टवेयर बनाती है। रिलायंस ने सी-स्क्वायर इंफो में 82 करोड़ रुपये का निवेश किया था। सी-स्क्वायर इंफो के कुछ ग्राहकों में अपोलो फार्मेसी और एडकॉक इनग्राम जैसे बड़े नाम शामिल हैं। जहां तक रिलायंस और नेटमेड्स के बीच डील का सवाल है तो नेटमेड्स ने अपने ग्राहकों को किराना जैसे सामानों की आपूर्ति के लिए रिलायंस रिटेल के साथ पहली ही डील कर रखी है।
क्या है रिलायंस का उद्देश्य
नेटमेड्स में निवेश करने का रिलायंस का कदम ऐसे समय पर सामने आ रहा है, जब कंपनी पहले से ही ऑनलाइन-टू-ऑफलाइन (O2O) कॉमर्स व्यापार को बढ़ाने पर जोर दे रही है। पिछले महीने रिलायंस रिटेल और व्हाट्सएप के बीच किराने सामान के लिए करार किया। व्हाट्सएप की मूल कंपनी फेसबुक द्वारा जियो प्लेटफार्म में 9.99 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 5.7 अरब डॉलर का निवेश करने पर सहमति के बाद यह सौदा हुआ। बता दें कि नेटमेड्स अपनी आमदनी का 90 फीसदी हिस्सा डॉक्टर की तरफ से बताई गई दवा और ओवर-द-काउंटर दवाओं से हासिल करती है। रिलायंस नेटमेड्स में इसलिए भी दिलचस्पी दिखा रही है क्योंकि भारत में ई-फार्मा इंडस्ट्री करीब 1.2 अरब डॉलर की है, जबकि 40 लाख से अधिक परिवार अब ऑनलाइन दवाएं खरीदते हैं।
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