किसानों से जुड़े नए कानून : एक तरफ हो रहा विरोध पर इस किसान पर बरसा पैसा

नयी दिल्ली। सितंबर में केंद्र सरकार ने कृषि से जुड़े तीन नये बिल पास किए थे। इन बिलों के कानून बनने का किसानों ने जम कर विरोध किया, जो अभी तक जारी है। पंजाब, हरियाणा और यूपी के किसानों ने इन कानूनों का खूब विरोध किया। मगर अब इन्हीं कानूनों के कारण एक किसान मालामाल हो गया है। महाराष्ट्र का एक मक्का उत्पादक हाल ही में बनाए गए कृषि सुधार कानूनों के तहत मुकदमा करने वाला पहला व्यक्ति बन गया। इस मक्का किसान ने दो व्यापारियों पर फसल के बदले पैसों का भुगतान नहीं करने के चलते मुकदमा किया और उन्हें 285,000 रु चुकाने के लिए मजबूर कर दिया।

क्या है भुगतान का कानून

क्या है भुगतान का कानून

किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020, देश में कृषि व्यापार को मुक्त करने के लिए सितंबर में पारित कानूनों में से एक है, जो खरीदारों को "लेनदेन के तीन दिनों के भीतर" किसानों को भुगतान करने के लिए अनिवार्य बनाता है। कुछ राज्यों में किसान, विशेषकर पंजाब, कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि इनसे उनकी सौदेबाजी की सुविधा खत्म हो जाएगी और फ्यूचर में बड़ी कंपनियों का एकाधिकार बन जाएगा। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के किसान जितेंद्र भोई के लिए ये कानून वरदान साबित हुआ। इस कानून से किसानों को समय पर पेमेंट मिलेगी, जिन्हें अपने बकाया के लिए खरीदारों के पीछे भागना पड़ता है।

नहीं थी कोई व्यवस्था

नहीं थी कोई व्यवस्था

किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020 के सितंबर में कानून बनने से पहले भारत में किसानों को समय पर भुगतान के लिए कोई मैकेनिज्म नहीं था। भोई के मामले की बात करें तो उन्होंने शिरपुर तहसील के भटाने गांव में अपने 18 एकड़ के खेत में इस गर्मी में मक्का की फसल उगाई। 19 जुलाई को उन्होंने दो व्यापारियों को 1,240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 270.95 क्विंटल मक्का बेचने के लिए सौदा किया। भोई की शिकायत के अनुसार कुल लेनदेन मूल्य 332,617 रुपये तय किया गया था।

पेमेंट न मिलने पर क्या किया

पेमेंट न मिलने पर क्या किया

व्यापारियों ने भोई की पूरी फसल ले ली और 25 हजार रु देकर बाकी 15 दिनों में चुकाने का वादा किया। मगर पैसे नहीं दिए। लगभग चार महीने के भुगतान में देरी के बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह में भोई ने अधिकारियों से संपर्क किया। एक क्लर्क ने उन्हें नए कानूनों के प्रावधान के बारे में बताया। फिर भोई ने शिकायत दर्ज करने का फैसला किया। किसी मजिस्ट्रेट के लिए भी ऐसे मामलों को 1 महीने के भीतर निपटाना जरूरी है। भोई की शिकायत पर व्यापारियों को बुलाया गया और कुछ कम सेटलमेंट राशि को 2 किस्तों में निपटा दिया गया।

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