नई दिल्ली, जुलाई 31। लगभग 72 लाख ईपीएफओ पेंशनभोगियों के लिए एक नयी सुविधा शुरू की गयी है। दरअसल उन्हें डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) जमा करने के लिए बैंक जाने की जरूरत नहीं होगी। पेंशन पाने के लिए यह एक जरूरी सर्टिफिकेट है। मगर अब पेंशनर्स को इसे जमा कराने के लिए बैंक शाखाओं या सामान्य सेवा केंद्रों जाने की आवश्यकता नहीं होगी। रिटायरमेंट फंड बॉडी ईपीएफओ ने शनिवार को एक नयी सुविधा शुरू की है। ये है फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी। इसका इस्तेमाल करके पेंशनभोगी अब कहीं से भी इस जरूरी सर्टिफिकेट को पेश कर सकता है।
मिलेगी खास सुविधा
नई सुविधा से उन पेंशनभोगियों को काफी मदद मिलेगी, जिन्हें वृद्धावस्था या स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के कारण अपने बायोमेट्रिक्स (फिंगरप्रिंट या आईरिस) प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। डीएलसी बनाने के लिए बायोमेट्रिक्स जरूरी हैं। बता दें कि ईपीएफओ ने पिछले वित्त वर्ष में करीब 13,000 करोड़ रुपये की पेंशन वितरित की थी।
क्या है नया सिस्टम
नये सिस्टम के तहत, एक पेंशनर्स अपने घर या किसी अन्य स्थान से डीएलसी प्रॉड्यूस कर सकता है। उसे बस एक एंड्रॉइड मोबाइल फोन से एक विशेष ऐप खोलने की जरूरत होगी। फिर एक फोटो लें और इसे अपलोड करें जो साबित करेगा कि वह अभी भी जीवित है। यह पेंशन सुनिश्चित करेगा। विदेश में रहने वाले पेंशनभोगी भी नई प्रणाली में अपना डीएलसी जहां कहीं भी हैं, वहां से जमा कर सकते हैं।
अभी क्या है नियम
अब तक, कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत पेंशन पाने वाले सभी पेंशनभोगियों को पेंशन मंजूर होने के महीने से 12 महीने के बाद बैंक प्रबंधक द्वारा प्रमाणित जीवन प्रमाण पत्र देना आवश्यक है। जिस बैंक के माध्यम से पेंशन का भुगतान किया जा रहा है उस बैंक में भौतिक फिजिकल प्रमाण पत्र जमा करना होता है। एक वर्ष के बाद जीवन प्रमाण पत्र जमा न करने के परिणामस्वरूप अंतिम जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की तारीख से 12 महीने के बाद या नए पेंशनभोगियों के मामले में पेंशन की मंजूरी के मामले में पेंशन रोक दी जाएगी।
बायो-मेट्रिक बन जाती है अड़चन
हालांकि, यह पाया गया है कि कई मामलों में बायोमेट्रिक्स हमेशा मेल नहीं खाते हैं। इसका कारण यह है कि मोतियाबिंद सर्जरी के बाद आईरिस मैच नहीं होता है या तो फिंगर प्रिंट मैच नहीं होता है। नतीजतन, पेंशनभोगियों को फिजिकल प्रोसेस से गुजरना पड़ा परेशानी भरा है। डीएलसी के लिए फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी के लॉन्च से उन पेंशनभोगियों को मदद मिलेगी, जिन्हें वृद्धावस्था के कारण अपने बायोमेट्रिक्स को कैप्चर करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ईपीएफओ का एक और फैसला
इस सप्ताह की शुरुआत में अपने ट्रस्टियों की बैठक में कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से अधिक विचार-विमर्श की मांग के बाद, ईपीएफओ ने इक्विटी में निवेश की सीमा को मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव नहीं लिया है। ईपीएफओ के ट्रस्टी हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा कि इक्विटी या इक्विटी से जुड़े उपकरणों में निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव 29 और 30 जुलाई को हुई केंद्रीय न्यासी बोर्ड की 231वीं बैठक में नहीं लिया गया।
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