New Delhi Railway Station stampede: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दुर्घटना में घायल यात्रियों के लिए अफरातफरी मच गई। कई लोग अस्पताल जाने के लिए मदद मांगते हुए दर्द से कराह रहे थे। रिश्तेदार मदद के लिए बेताब थे, लेकिन न तो सैनिक और न ही एंबुलेंस उपलब्ध थी। कुछ लोगों को अपने प्रियजनों को ले जाने के लिए पैदल या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।

प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों में भीड़ बढ़ने से स्थिति और भी खराब हो गई। पिछले कुछ दिनों में स्टेशन पर लोगों की बढ़ती संख्या के बावजूद घायलों को ले जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। नतीजतन, कई लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए। प्रशासन ने तब ध्यान दिया जब लोक नायक अस्पताल में 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई।
अपर्याप्त सुरक्षा और प्रतिक्रिया
प्रयागराज जाने वाली ज़्यादातर ट्रेनें नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से रात 8 बजे के बाद निकलती हैं, जो प्लैटफ़ॉर्म 12 से 16 तक से चलती हैं। प्रस्थान समय से काफ़ी पहले ही भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। विशेषज्ञों ने पाया कि इस स्टेशन से यात्रा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शनिवार शाम को बिना किसी सुरक्षा उपाय के भीड़ बढ़ गई।
इन प्लेटफॉर्म पर केवल मुट्ठी भर पुलिस अधिकारी ही मौजूद थे, जबकि परिस्थितियों को देखते हुए हर प्लेटफॉर्म पर कम से कम 30 से 40 पुलिस अधिकारी तैनात होने चाहिए थे। रेलवे कर्मचारी भी काफी हद तक अनुपस्थित थे। इतनी बड़ी घटना के बावजूद अधिकारी तब तक अनजान बने रहे जब तक बहुत देर हो चुकी थी।
आपातकालीन सेवाओं का अभाव
यह लापरवाही आपातकालीन सेवाओं तक भी फैली हुई है। घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचने में देरी का सामना करना पड़ा क्योंकि वहां केवल एक ही एम्बुलेंस खड़ी थी। ऐसी स्थिति में तुरंत अधिक एम्बुलेंस भेजी जानी चाहिए थी। कुछ घायल व्यक्ति ऑटो या यात्रियों को छोड़ने वालों द्वारा उपलब्ध कराए गए निजी वाहनों का इस्तेमाल करके अस्पताल पहुंचे।
हैरानी की बात यह है कि इस बड़ी घटना के बाद भी प्रशासन तब तक बेखबर रहा जब तक लोक नायक अस्पताल ने घायलों में से 15 से 18 की मौत की पुष्टि नहीं कर दी। इसके बाद आनन-फानन में करीब 50 एंबुलेंस भेजी गईं और रेलवे स्टेशन पर एनडीआरएफ, पुलिस और अन्य एजेंसियों को बुलाया गया।
तैयारियों पर उठे सवाल
इस घटना से सवाल उठता है कि स्टेशन पर बढ़ती भीड़ के बावजूद ज़रूरी इंतजाम पहले क्यों नहीं किए गए। तैयारी और प्रतिक्रिया की कमी ऐसी स्थितियों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में गंभीर खामियों को उजागर करती है। प्रशासन की विलंबित प्रतिक्रिया भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे अधिकारियों और आपातकालीन सेवाओं के बीच बेहतर योजना और कॉर्डिनेशन की आवश्यकता को दिखाता है।
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