Pakistan-Saudi Arabia defence deal: सऊदी अरब और परमाणु हथियार देश पाकिस्तान ने एक पारस्परिक रक्षा समझौते पर साइन किए हैं। इसके तहत किसी भी देश पर होने वाले हमले को दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।

पाकिस्तान और सऊदी डिफेंस डील
इस समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रियाद में अपनी सऊदी यात्रा के दौरान साइन किए है। सऊदी अरब के पाकिस्तान के साथ लंबे समय से आर्थिक, धार्मिक और सुरक्षा संबंध रहे हैं। समझौते में किसी भी देश का नाम लिए बिना कहा गया है कि किसी भी देश के विरुद्ध किसी भी आक्रमण को दोनों के विरुद्ध आक्रमण माना जाएगा।
NATO स्टाइल में हुआ समझौता
NATO स्टाइल के इस रक्षा समझौते और "एक पर हमला = दोनों पर हमला" की शब्दावली को इस्लामाबाद में एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जाएगा। लेकिन यह नया समझौता दोनों इस्लामी देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सालों के ठंडे रिश्तों के बाद सऊदी-पाकिस्तान संबंधों के नए सिरे से शुरू होने का भी प्रतीक है।
भारत का रिएक्शन
भारत ने गुरुवार को कहा कि वह पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हस्ताक्षरित नए रक्षा समझौते के प्रभाव की सावधानीपूर्वक जांच करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके संभावित प्रभावों को ध्यान में रखेगा।
विश्लेषक इस समझौते को दिखावा मात्र बता रहे हैं और इसे भारत से ज्यादा इजराइल पर निशाना बनाया जा रहा है।
भारत के लिए इस समझौते का क्या मतलब है?
विशेषज्ञों और भू-राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि सऊदी अरब पाकिस्तान के लिए भारत के साथ युद्ध करेगा। जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है, और घोषणा का समय भी अलग है।इस समझौते से जुड़े दिखावे से सावधान सऊदी अरब ने तुरंत इसे भारत के साथ अपने संबंधों से अलग कर लिया, जिसके बारे में उसने कहा कि यह "पहले से कहीं ज्यादा मजबूत" है।
एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि यह समझौता किसी खास देश या खास घटनाओं की प्रतिक्रिया नहीं है... भारत के साथ हमारे रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हैं। हम इस रिश्ते को आगे बढ़ाते रहेंगे और क्षेत्रीय शांति में हर संभव योगदान देने की कोशिश करेंगे। सऊदी अरब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि नई दिल्ली रियाद का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में, द्विपक्षीय व्यापार 41.88 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध हैं।
दूसरी ओर, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच व्यापार मुश्किल से 3-4 अरब अमेरिकी डॉलर का है। इसलिए, यह संभावना नहीं है कि सऊदी अरब भारत के खिलाफ जाएगा।
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