ISRO Day 2024: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हाल के सालों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति की है। एसएलवी-3 India का पहला स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल था, जिसका निर्देशन पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था।

इसरो के मार्स मिशन को सबसे कम खर्च में सफल हुए मिशन में से एक माना जाता है, इस पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इस खर्च के बारे में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया था कि यह हॉलीवुड फिल्म ग्रेविटी के बजट से भी कम है। इसरो ने कई अंतरिक्ष यान, उपग्रहों, और तकनीकी कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
मंगलयान-1 मिशन (Achievements of ISRO)
इसकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में मंगलयान-1 मिशन भी शामिल है। साल 2013 में भारतीय अंतरिक्ष यान, मंगलयान-1, की सफलता ने भारत को मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक पहुंचाया। यह उपलब्धि हासिल करने वाला भारत पहला एशियाई देश बन गया। यह मिशन आंतरिक सौरमंडल की जानकारी हासिल करने के लिए टेक विकसित करने की दिशा में भारत की एक बड़ी छलांग भी रहा है।
मंगल मिशन और चन्द्रमा से जुड़ा मिशन (ISRO Recent Achievements)
2008 में लॉन्च किया गया चंद्रयान-1 भारत का पहला चंद्र मिशन था। इसने चंद्रमा की सतह के बारे में बेहद जरूरी डेटा प्रदान किया। इसके बाद, साल 2019 में चंद्रयान-2 लॉन्च किया गया और यह चंद्रमा पर उतरने में सफल रहा, हालांकि, कुछ समय बाद लैंडर से संपर्क टूट गया था। इस मिशन से भारत, चंद्रमा पर लैंडर भेजने वाला पहला देश बना दिया।
वहीं, साल 2012 में, इसरो ने PSLV-C21 रॉकेट का उपयोग करके पृथ्वी की कक्षा में दो उपग्रहों को लॉन्च करके अपने 100वें अंतरिक्ष मिशन का जश्न मनाया। यह खास कदम वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में इसरो की निरंतर प्रगति और योगदान को भी दिखाता है।
नेविगेशन को मिला बढ़ावा (Achievements of India in Space Research)
इसरो ने अपने भारतीय नेविगेशन उपग्रहों के माध्यम से भारत की नेविगेशन और संचार क्षमताओं को भी बढ़ाया है। इन उपग्रहों ने बेहतर नेविगेशन और अनोखी सुविधाएं प्रदान करके भारत की नई स्पेस यात्राएं करने की क्षमता को मजबूत किया है।
सैटेलाइट निर्माण के साथ लॉन्च (ISRO's Achievements)
इस संगठन ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण कई उपग्रहों के निर्माण और लॉन्चिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन प्रयासों ने वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में भारत की स्थिति को मजबूत किया है।
इसरो की उपलब्धियां अंतरिक्ष से जुड़ी रिसर्च और टकनीक की मदद से भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती हैं। इसरो के नए प्रयास दुनिया भर में महत्वपूर्ण प्रभाव डालते है और आगे भी जारी रखेंगे।
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