Systematic Transfer Plan: आपने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के बारे में तो सुना ही होगा, इसके जरिए म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट किया जाता है। आज हम आपको एक और स्कीम के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका नाम है सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान यानी एसटीपी। ज्यादातर लोगों को नहीं पता है, लेकिन सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान भी म्युचुअल फंड में पैसे निवेश करने का एक तरीका होता है। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि अगर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान और सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान दोनों के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता है, तो दोनों के बीच में क्या अंतर है? इस आर्टिकल में हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं।
आइए अब आपको एसआईपी और एसटीपी के बारे में मुख्य फर्क बताते हैं। इसके साथ ही आपको एसटीपी की वर्किंग मॉडल से अवगत करवाते हैं। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के बारे में आजकल सभी को पता है। इस प्लान के जरिए आप म्युचुअल फंड स्कीम में छोटी-छोटी इन्वेस्टमेंट करके लंबे समय में एक बड़ी रकम तैयार कर सकते हैं। इसमें आपको अपना अमाउंट और पैसे जमा करने के समय को फिक्स करने की छूट होती है।

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के तहत आप 1 महीने में, 3 महीने में, 6 महीने में या फिर 1 साल में इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं। इसमें यह आप पर डिपेंड करता है कि आप कितने टाइम पीरियड में कितने पैसे इन्वेस्ट करना चाहते हैं।
क्या है सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान
सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान भी एसआईपी की तरह ही एक स्कीम है, जिसके जरिए म्यूचुअल फंड में पैसा डाला जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि अगर आपको एक साथ बड़ी रकम म्युचुअल फंड प्लान में लगानी है तो, सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान को सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है। इस प्लान के जरिए ज्यादातर डेट फंड में इन्वेस्टमेंट किया जाता है और फिर उसे एक निश्चित समय अंतराल के बाद इक्विटी स्कीम्स में ट्रांसफर किया जाता है।
इसका मतलब अगर एसटीपी के तहत आप एक बार किसी म्युचुअल फंड स्कीम में एक मुश्त पैसा लगाते हैं, तो उसे एक समय अंतराल के बाद दूसरे म्युचुअल फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
एक मान लीजिए आपके पास 200,000 का अमाउंट है और आप उसे इक्विटी फंड में इन्वेस्ट करना चाहते हैं तो एसटीपी की मदद से इसे सुरक्षित तरीके से इन्वेस्ट किया जा सकता है। इसके लिए आपको कोई लिक्विड फंड या डेट स्कीम का लास्ट नहीं होती है और पूरे पैसे उसमें लगाने होंगे।
अब जब आप ऐसे किसी डेट फंड में पैसा लगाते हैं तो, इस समय आपको एक टाइम पीरियड भी फिक्स करना होता है, जिसमें आपका अमाउंट इक्विटी में ट्रांसफर होना है। ऐसे में अगर आप 6 लाख रुपए को 1 साल के अंदर इक्विटी फंड में ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो अगले साल 12 महीना तक हर महीने 50,000 की रकम इक्विटी म्युचुअल फंड अकाउंट से इक्विटी फंड में ट्रांसफर होती जाती है।
जब लोगों को एक साथ इक्विटी फंड में पैसा लगाना होता है, लेकिन उन्हें अपने पैसे को मार्केट में आने वाले उतार-चढ़ाव से भी सुरक्षित रखना होता है, आमतौर पर लोगों के द्वारा एसटीपी का इस्तेमाल तब किया जाता है।
अगर बात की जाए एसआईपी और एसटीपी के मुख्य अंतर की तो आप इन दोनों प्लान के जरिए इन्वेस्टमेंट का मकसद अलग-अलग होता है।
एसआईपी के जरिए छोटे-छोटे इन्वेस्टमेंट प्लान को लंबी अवधि के लिए इन्वेस्ट किया जाता है। हालांकि सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लेटफार्म का इस्तेमाल तब किया जाता है जब आपको एक साथ बड़ी रकम इक्विटी में ट्रांसफर करनी हो। इक्विटी में एक बार में डायरेक्ट सारा पैसा लगाना काफी जोखिम बड़ा हो सकता है। सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान के इस्तेमाल से धीरे-धीरे आपका पैसा इक्विटी मार्केट में ट्रांसफर होता है, जिससे मार्केट रिस्क काफी कम हो जाता है।


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