नयी दिल्ली। म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए कई तरह की स्कीम और फंड्स होते हैं। इनमें इक्विटी और डेब्ट प्रमुख हैं, जबकि इनमें भी अलग-अलग श्रेणियां होती हैं। इन्हीं में एक कैटेगरी है ओवरनाइट फंड। ओवरनाइट फंड आपका पैसा रोज बढ़ाने में मदद करते हैं। बाजार रेगुलेटर सेबी की परिभाषा के अनुसार ओवरनाइट फंड ओपन-एंडेड डेब्ट म्यूचुअल फंड स्कीम होती हैं जो सिर्फ एक दिन की मैच्योरिटी के साथ ओवरनाइट सिक्योरिटीज में निवेश करती हैं। इसका मतलब है कि फंड मैनेजर इन योजनाओं में दैनिक आधार पर सिक्योरिटीज खरीदता है। ये सिक्योरिटीज एक दिन में मैच्योर हो जाती हैं और सारा पैसा नई सिक्योरिटीज खरीदने में लगा दिया जाता है। इस तरह ये स्कीम बेहद अधिक लिक्विड होती हैं। आइए जानते हैं इस फंड्स के बारे में पूरी बात।
होते हैं बहुत सुरक्षित
ओवरनाइट फंड्स को डेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में सबसे सुरक्षित माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इनकी निवेश अवधि बेहद कम होती है। इससे होता है ये है कि ब्याज दर में बदलाव और प्रतिभूतियों में चूक ये योजनाएं प्रभावित नहीं होतीं। यही कारण है कि कई निवेश एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये योजनाएं उन लोगों के लिए बेहतर हैं जो थोड़े अतिरिक्त रिटर्न के साथ कम से कम जोखिम के लिए पैसा लगाना चाहते हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंजर्वेटिव डेब्ट म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए ओवरनाइट फंड सबसे अच्छा विकल्प नहीं है।
किसके लिए बेस्ट हैं ओवरनाइट फंड्स
ओवरनाइट फंड्स में बहुत कम जोखिम होता है। इन फंड्स को उन लोगों के लिए बेस्ट बताया जाता है, जो कम समय के लिए अधिक पैसा निवेश करना चाहते हैं। आम तौर पर बड़ी कंपनियां इस तरह के फंड्स में करोड़ों रुपये का निवेश करती हैं। असल में होता ये है कि बड़ी राशि में थोड़ा रिटर्न भी बहुत हो जाता है। वैसे तो ये फंड्स रिटेल निवेशकों के लिए बेहतर ऑप्शन हैं। मगर इन फंड्स में रिटेल निवेशकों के लिए अतिरिक्त रिटर्न हासिल करना थोड़ा मुश्किल होता है। मगर सबसे अच्छी बात ये है कि ओवरनाइट फंड्स में लॉक-इन पीरियड नहीं होता।
टैक्स का भी रखें ध्यान
अन्य डेब्ट म्यूचुअल फंड्स की तरह यदि ओवरनाइट फंड्स को 3 साल से ज्यादा समय के लिए रखे जाएं तो उन पर इंडेक्सेशन के साथ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स लगेगा। यदि इन्हें तीन साल से पहले बेचा जाए है तो आपको अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स का भुगतान करना होगा। यदि आप डिविडेंड ऑप्शन चुनते हैं तो 29.12% का लाभांश वितरण टैक्स लगेगा।
कैसे चुनें बेस्ट स्कीम
अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाह रहे हैं तो ध्यान रहे कि हाल के प्रदर्शन के बजाय लंबी अवधि का रिटर्न देखें। कुछ स्कीम शेयर बाजार के ऊपर जाने पर उच्च रिटर्न दे सकती हैं और शेयर बाजार के नीचे जाने पर आपका नुकसान करवा सकती हैं। उदाहरण के लिए किसी फंड ने पिछले छह वर्षों में औसतन 19 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया है। ऐसा फंड उस फंड से बेहतर है जो पहले तीन वर्षों में 28 प्रतिशत रिटर्न है, लेकिन अगले तीन सालों में 3 प्रतिशत फीसदी सालाना रिटर्न दे। क्योंकि इसके 6 सालों का औसत रिटर्न 14.7 प्रतिशत रह गया और 19 फीसदी वाले फंड के मुकाबले नहीं टिक पाएगा।
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