नयी दिल्ली। कोरोना संकट और शुरुआती लॉकडाउन में शेयर बाजार में भारी गिरावट के चलते कई इक्विटी स्कीम के रिर्टन निगेटिव हो गए थे, जिससे निवेशकों को नुकसान हुआ था। मगर सरकार के राहत पैकेज और आरबीआई की तरफ से लिक्विडिटी बढ़ाने से लॉकडाउन के दौरान ही शेयर बाजार में हुई वापसी से म्यूचुअल फंड की इक्विटी योजनाओं ने 25 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है। मगर कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि यह कमजोर शेयर बाजार में आई थोड़ी मजबूती से ज्यादा कुछ भी नहीं है। एक्सपर्ट कहते हैं कि मार्च के निचले स्तरों से म्यूचुअल फंड्स ने वापसी की है, मगर लंबी अवधि में इनके रिटर्न अभी भी खराब हैं। मगर मार्च से अंतिम सप्ताह से जून के पहले हफ्ते तक इक्विटी स्कीम ने जोरदार रिटर्न दिया है।
कितना बना निवेशकों के पैसा
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मॉर्निंगस्टार इंडिया ने जो आंकड़ों इकट्ठे किए हैं उनके अनुसार सभी इक्विटी स्कीम श्रेणियों, जिनमें इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस), मिड-कैप, लार्ज और मिड-कैप, लार्ज-कैप, स्मॉल-कैप, मिड-कैप और मल्टी-कैप, ने 25 मार्च से 3 जून के बीच 23-25 प्रतिशत की सीमा में जोरदार रिटर्न दिया है। इस दौरान लार्ज-कैप फंड्स ने 25.1 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। उसके बाद मल्टी-कैप (25 प्रतिशत), ईएलएसएस और मिड-कैप फ़ंड (24.9 प्रतिशत प्रत्येक), स्मॉल-कैप (24 प्रतिशत) और मिडकैप (23.2 प्रतिशत) का नंबर है।
शेयर बाजार ने भी की रिकवरी
जानकारी के लिए बता दें इसी अवधि में शेयर बाजार ने 25-30 प्रतिशत की रिकवरी की है। वैसे जहां तक अधिकांश एक्टिव फंड्स ने अपने संबंधित बेंचमार्क सूचकांकों के मुकाबले कम वापसी की है। कोरोना महामारी का मुकाबला करने के लिए लॉकडाउन 25 मार्च से शुरू हुआ और ये कुछ राज्यों द्वारा इसे कंटेनमेंट जोन में 30 जून तक के लिए बढ़ा दिया गया है। इससे पहले 19 फरवरी से लॉकडाउन की घोषणा तक इक्विटी स्कीमों ने 32-37 फीसदी की सीमा में नकारात्मक रिटर्न दिया था। शेयर बाजार में रिकवरी के साथ म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम भी पटरी पर लौट आईं।
विदेशी निवशकों का भी भरोसा बढ़ा
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई), जिन्होंने मार्च में धुंआधार रिकॉर्ड बिकवाली की थी, ने पिछले महीने की तुलना में इक्विटी में अच्छा निवेश किया है। 19 फरवरी से 24 मार्च के दौरान शेयर बाजारों में 35 फीसदी और इक्विटी म्यूचुअल फंड में 37 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। इस दौरान एफपीआई ने भी खूब बिकवाली की। मगर मई में एफपीआई ने भारतीय बाजारों में अच्छा पैसा लगाया। जहां तक आने वाले समय में निवेश का सवाल है तो जानकार इक्विटी जैसे अस्थिर निवेश ऑप्शन में 7-10 सालों की लंबी अवधि के लिहाज से निवेश करने की सलाह देते हैं।


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